74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 278

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देवियो और सज्जनो, मुझे पूरी उम्मीद है कि यह संकल्प, जिसको मैं आपके द्वारा स्वीकार किए जाने की सिफारिश कर रहा हूं, आप सभी को पसंद आएगा और इसे आपका सर्वसम्मति से समर्थन प्राप्त होगा। किसी को भी यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि एकता में शक्ति होती है, इसका महत्व तो स्वतः स्पष्ट है। यह सामूहिक दबाव बनाने का समय है और जब तक हम एक संगठन के अंतर्गत अपनी पूरी शक्ति नहीं लगाते हैं तब तक हम अन्य बड़े समुदायों द्वारा किए जा रहे आक्रमणों का प्रतिकार करने की आशा नहीं कर सकते हैं। हम सब यह जानते हैं कि हिंदू जाति कांग्रेस के अंतर्गत और मुसलमान अपनी लीग के अंतर्गत बहुत शक्तिशाली ढंग से संगठित हैं। इन तथ्यों को जानते हुए भी, यदि हम एक परिसंघ के अंतर्गत संयुक्त नहीं होते हैं, तो हमारे विरोधी हमारी इस फूट का लाभ उठाएंगे और हमारे ही एक भाग को दूसरे से लड़वाएंगे। इस प्रकार, जब हम छोटे-छोटे झगड़ों में आपस में उलझे होंगे तो दुनिया को यह बताया जाएगा कि दलित वर्गों की पृथक अस्तित्व जैसी कोई बात ही नहीं है। हमारे पास अपने विरोधियों से लड़ने का कोई अवसर न होगा और इस प्रकार हमारी फूट हमारे पतन का कारण बनेगी। कोई भी इस बात का आसानी के साथ अनुमान लगा सकता है कि आने वाले समय में सबसे खराब अयोग्यताएं हमारा इंतजार कर रही हैं, अतः क्या हमें हिंदू जाति के भले के लिए अपने घुटने टेक देने चाहिए?

इस संकल्प की मांग है कि सभी प्रांतीय संगठनों को एक केन्द्रीय संगठन के अंतर्गत मिलकर कार्य करना चाहिए। युद्ध के समय युद्धरत देशों की राजनैतिक पार्टियां अपने अस्तित्व को भूलकर साझे शत्रु का सामना करने के लिए मिलकर कार्य करती हैं। हमें समय रहते यह जान लेना चाहिए कि हमारी लड़ाई हमारे अस्तित्व की लड़ाई से किसी भी मायने में कम नहीं है। मुझे इस बात का पूर्ण विश्वास है हममें से प्रत्येक व्यक्ति गुलाम की तरह जीने की अपेक्षा मर जाना पसंद करेगा। तो क्यों नहीं, इस पुरानी कहावत का अनुसरण करिए कि छोटी रोकथाम बड़े उपचार की तुलना में कहीं बेहतर है। अत्यधिक विलंब होने के पहले ही संगठित हो जाइए और अपनी ओर देख रही बुराइयों को रोकिए। यदि बुराइयों ने आप पर कब्जा जमा लिया, तो उनका उपचार संभव न हो पाएगा। यह संभव है कि हममें से कुछ लोगों को एक नेतृत्व के अंतर्गत कार्य करने में अपने महत्व की कमी प्रतीत हो लेकिन मैं ये आप पर छोड़ता हूं कि क्या कुछ व्यक्तियों के महत्व की कमी लाखों व्यक्तियों को होने वाली हानि से बड़ी है। मैं आपसे न केवल सर्वसम्मति से इस संकल्प को स्वीकार करने की अपील करता हूं बल्कि यह आग्रह भी करता हूं कि बिना समय व्यर्थ किए विभिन्न स्थानीय संगठनों को एक केन्द्रीय नेतृत्व के अंतर्गत ले आएं। मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि कुछ ऐसे महत्वपूर्ण संगठन हैं जो हमारे साथ नहीं