258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है बल्कि मैं जो मैं कह रहा हूं उसका तात्पर्य यह है कि कोई भी संगठन, भले ही वह महत्वपूर्ण न हो, हमारे संगठन से अलग नहीं रहना चाहिए। इन कुछ शब्दों के साथ मैं आपकी स्वीकृति के लिए इस संकल्प की सिफारिश करता हूं।
इसके पश्चात राव बहादुर एन. शिवराज ने संकल्प का अनुमोदन करने के लिए राय साहब एन. सी. घूसिया, बंगाल को आमंत्रित किया।
तदनुसार राय साहब एन. सी. धूसिया ने संकल्प का अनुमोदन किया।
अनंतर निम्नलिखित ने इस संकल्प का समर्थन कियाः
(1) श्री पी. एन. राजभोज, पूना (बंबई)
(2) श्री मांगीलाल (राजपुताना)
(3) श्री बी. सी. मण्डल, बी.ए. (कलकत्ता)
(4) श्री बद्रीप्रसाद वाल्मीकि, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
(5) श्री पी. एल. के. तालिब, एम.ए., एलएल.बी. (लखनऊ, उत्तर प्रदेश)
(6) श्री पी. जे. रोहम, एम.एल.ए., अहमदनगर (बंबई)।
राव बहादुर एन. शिवराज ने कहा, ‘‘चूंकि संकल्प संख्या V को प्रस्तावित, विधिवत अनुमोदित और समर्थित किया जा चुका है, अब मैं इस पर आपके मत आमंत्रित करता हूं। वे सभी व्यक्ति जो इस संकल्प के पक्ष में हैं अपनी सहमति दर्शाने के लिए अपने हाथ उठाएं (सभी लोग अपने हाथ उठाए प्रतीत हुए)। ऐसे सभी व्यक्ति जो इस संकल्प के विरुद्ध हैं अपने अननुमोदन को दर्शाने के लिए अपने हाथ उठाएं। मुझे कोई भी इस संकल्प के विरुद्ध नहीं मिला है। मैं इस संकल्प को सर्वसम्मति से पारित घोषित करता हूं।’’
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डॉ. अमबेडकर द्वारा समापन भाषण
राव बहादुर एन. शिवराज ने इसके पश्चात डॉ. अम्बेडकर द्वारा किए गए वायदे के अनुसार उनसे भाषण देने का अनुरोध किया।
डॉ. अम्बेडकर इस बार मराठी में बोले, उन्होंने कहाः
मित्रों, पिछले दस वर्ष के दौरान राजनैतिक आंदोलन ने बहुत प्रगति की है। फिर भी मैं इस बात के प्रति पूर्णतः आश्वस्त हूं कि जहां तक अछूतों का सवाल है, आपके द्वारा आज पारित संकल्प एक नए युग का सूत्रपात है। जैसा कि आप