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जानते हैं मैं कल से अपने नए पद का कार्यभार संभालने जा रहा हूं। इसलिए पिछले बीस वर्ष के दौरान मेरे द्वारा किए गए कार्यों का ब्यौरा आपको देना मैं अपना कर्तव्य मानता हूं। (यहां पर डॉ. अम्बेडकर ने दलित वर्गों द्वारा पिछले बीस वर्ष के दौरान की गई राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति का ब्यौरा मराठी भाषा में पुनः प्रस्तुत किया।)
मैं आपको बताना चाहता हूं कि मुसलमानों और अछूतों की स्थिति में पर्याप्त अंतर है हालांकि दोनों को ही अल्पसंख्यक माना जाता है। हमारे समुदाय की तुलना में मुसलमान समुदाय बहुत संपन्न हैं। अंग्रेजों के आने से पहले तक वे इस देश के शासक थे। इस प्रकार विगत में उनकी स्थिति श्रेष्ठ रही है और उनके द्वारा की गई प्रगति निश्चित तौर पर हमसे बहुत अधिक है। शताब्दियों से हमारा शोषण होता रहा है। हमारी आर्थिक स्थिति निर्धनता की पराकाष्ठा की द्योतक है। हम केवल जनसंख्या के आधार पर मुसलमानों से अपनी तुलना नहीं कर सकते हैं। हमें प्रारम्भ से ही केवल अपने प्रयासों पर भरोसा करते हुए अपने लिए कार्य करना होगा। हमें अपने समुदाय को ऊंचा उठाना होगा। मेरी नई नियुक्ति के कारण अब इस कार्य को करने का दायित्व और लोगों पर आ गया है। मुझे पद से कोई प्यार नहीं है मैं बिल्कुल ठीक हूं जैसाकि मैं पहले था। मैं नहीं समझता हूं कि ‘‘माननीय डॉ. अम्बेडकर’’ और साधारण ‘‘डॉ. अम्बेडकर’’ में कोई अंतर है। अपनी नियुक्ति के संबंध में जो बात मैं। सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानता हूं वह यह है कि अब एक परंपरा स्थापित हो गई है कि की कार्यकारिणी परिषद में दलित वर्गों के प्रतिनिधि के लिए एक स्थान होगा। ब्राह्मणवाद के लिए यह एक प्राणघातक धक्का है। इसी बात में मेरी नियुक्ति का महत्व निहित है। इस प्रकार की किसी परंपरा का होना किसी भी प्रकार से ब्राह्मणवाद के हित में नहीं था। इसको मैं अछूतों के लिए एक महान विजय मानता हूं।
बहुत से लोग ऐसे हैं जिनका व्यवहार मेरे प्रति ठीक नहीं है। मैं स्वभाव से अकेला रहने वाला और अपना समय पढ़ने में बिताने वाला व्यक्ति हूं। अनेक लोग मेरे इस स्वभाव को इस बात का संकेत समझते हैं कि मैं लोगों से उचित रूप से व्यवहार नहीं करता हूं और उन्हें अनदेखा करता हूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मेरा कभी भी किसी का अपमान करने का उद्देश्य नहीं रहा है। मेरा समय सीमित है। मुझे बहुत से कार्य करने हैं और मेरे पास कोई सहायक नहीं है।
अनेक हिंदू मुझे अपने शत्रु के रूप में देखते हैं। वे शिकायत करते हैं कि मैं उनकी भावनाओं को आहत करने के लिए कठोर वचनों का प्रयोग करता हूं। मैं जानता हूं कि मैं हृदय से दयालु हूं और यहां तक कि ब्राह्मणों में भी मेरे अनेक