260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मित्र हैं। लेकिन एक दयालु हृदय वाले व्यक्ति को भी सच तो बोलना ही पड़ता है। जब वह अपने निकट संबंधियों के साथ कुत्तों से भी खराब व्यवहार होता हुआ तथा उनकी भावी प्रगति को हर प्रकार से अवरुद्ध देखता है तो किस प्रकार से वे मुझसे उनके प्रति दयापूर्ण व्यवहार की आशा कर सकते हैं जैसेकि उन्होंने कुछ किया ही न हो। मैं अपनी भावनाओं को दबाने का और अपने विरोधियों के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करने का प्रयास करता हूं लेकिन अपराधबोध वाले वे लोग इससे चिढ़ते हैं, हालांकि मेरा अपने विरोधियों के प्रति व्यवहार कभी भी दयापूर्ण न रहा हो, ऐसा नहीं है।
निश्चित तौर पर मेरा विचार है कि देश के राजनीतिक अधिकारों को हिंदुओं, मुसलमानों और दलित वर्गों के बीच बांटा जाना चाहिए। दलित वर्गों को कानून के माध्यम से हिंदुओं और मुसलमानों के साथ देश की सरकार में उचित हिस्सा मिलना चाहिए। भविष्य का संविधान केवल उसी स्थिति में काम कर सकता है यदि वह इन तीन स्तंभों पर आधारित हो। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप सबको एक झंडे के नीचे एक साथ आना होगा और केवल एक ही संगठन बनाना होगा। यदि हम अभी तक संविधान में वह स्थिति नहीं प्राप्त कर पाए हैं जोकि हमारा हक है तो इसका कारण यह है कि हम संगठित नहीं हैं। यदि आप सभी एकता के सूत्र में बंध जाएंगे और एक संगठन के अंतर्गत कार्य करेंगे तो मुझे कोई संदेह नहीं है कि आप उस स्थिति तक जरूर पहुंचेंगे जिसके आप हकदार हैं।
कांग्रेस एक बड़ा संगठन है और इसका प्रभाव दूर-दूर तक फैला हुआ है। स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि ऐसा क्यों है, और हमारा संगठन इतना फैला हुआ क्यों नहीं है। दो बातें कांग्रेस के पक्ष में हैं। भारत का पूरा प्रेस कांग्रेस के पीछे है। इसको पूर्ण प्रचार मिलता है। हमें राष्ट्रवादी हिंदू प्रेस से कोई प्रचार नहीं मिल सकता। दूसरे, कांग्रेस के पास धन है। आपको याद होगा कि कांग्रेस ने एक करोड़ रुपए की निधि एकत्र की थी। यह बड़ी निधि ही इसकी सफलता का रहस्य है। लेकिन अपने समुदाय से संबंधित कार्य के लिए मैंने कभी भी निधि के लिए नहीं कहा। हमने जो भी प्रगति और संगठन प्राप्त किया है वह हमने निधि की सहायता के बिना ही किया है। तथापि, मैं आपको बताना चाहूंगा कि अपने संगठन को खड़ा करने के लिए निधि एकत्र करना बहुत आवश्यक है और निधि के बिना हमारा समुदाय आगे बढ़ने में तथा पहले से ही सुसंगठित अन्य समुदायों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में सफल नहीं होगा।
सार्वजनिक जीवन में गलतियां होती हैं, लेकिन हमें इनसे हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। केवल गलतियों के माध्यम से ही हम अपनी कमजोरियों का पता लगा