74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 282

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सकते हैं और उन्हें सुधार कर सकते हैं।

पूरे भारत के लिए एक संगठन बनाने संबंधी आपके आज के निर्णय से मैं बहुत प्रसन्न हूं। अब आपको प्रत्येक प्रांत में इसकी शाखाएं स्थापित करनी होंगी और आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी मौजूदा संगठन इसी एक अखिल भारतीय परिसंघ में विलय हो जाएं।

यह मेरी बहुत बड़ी इच्छा है कि हमारे संगठन के भवन न केवल प्रत्येक प्रांत बल्कि प्रत्येक नगर में हों जोकि कार्यालय और क्रियाकलाप के केन्द्र के रूप में कार्य करें। कल रात मैं श्री दशरथ पाटिल, जोकि बेला (नागपुर) से हैं, से बात कर रहा था। मैंने उनसे नागपुर में जमीन खरीदकर हमारे संगठन का भवन खड़ा करने के लिए कहा। आप यह कार्य बीस से पचीस हजार रुपए में कर सकते हैं। यदि आप ऐसा करेंगे और नागपुर में ऐसे किसी भवन की नींव का पत्थर रखने के लिए मुझे आमंत्रित करेंगे तो मुझे आपका आमंत्रण स्वीकार करने में बहुत अधिक प्रसन्नता होगी। (इस अवसर पर श्री सीताराम हदके ने भानखेड़ा बस्ती, नागपुर की ओर से 250 रुपए भेंट किए।) डॉ. अम्बेडकर ने यह राशि स्वीकार की और इसको भवन निधि में लगाने के लिए श्री दशरथ पाटिल को दे दिया।

श्री आर. वी. कवाडे, महासचिव ने धन्यवाद व्यक्त किया। इसके पश्चात अध्यक्ष ने सत्र की समाप्ति की घोषणा की। ख्1,

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1 रिपोर्ट ऑफ डिप्रेस्ड क्लासेज कांफ्रेंस, नागपुर अधिवेशन, जुलाई, 1942