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आपने, जो एक उभरते हुए वकील जिनका भविष्य बहुत व्यापक था, अपना सब कुछ दांव पर लगाते हुए परेशान और उत्पीडि़त लोगों को राहत दिलाने के लिए पूरे हृदय से अपने आपको संघर्ष में झोंक दिया। ऐसा करने में आप इस बात का अनुभव करने के लिए नहीं रुके कि आप अपने भविष्य के ग्राहकों, अर्थात अगड़े वर्गों का विरोध दलित वर्गों के हितों की लड़ाई के लिए जो तथाकथित हिंदू जाति के विरुद्ध लड़ाई है, का विरोध कर रहे हैं। उस समय किसी ने भी यह अनुमान नहीं किया था कि आपके प्रयास दो दशकों के छोटे समय में दलित वर्गों के अधिकारों की मान्यता रूपी परिणामों के रूप में देश की सर्वोच्च कार्यपालिका में एक स्थान पर एक हस्ती की तरह सामने आएंगे।
रेलवे स्टेशन नागपुर से सम्मेलन के पंडाल तक का जुलूस और सम्मेलन सत्र में लोगों की भारी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि हमारे समुदाय के लोग आपका किस सीमा तक आदर करते हैं। यह स्वतः उद्गार हमारे वर्गों का आपके द्वारा किए गए कार्यों के संबंध में आपके लिए उनके समर्पण को दर्शाता है। आप हमारे लिए सृष्टिकर्ता से बढ़कर हैं। हमको सृष्टिकर्ता द्वारा एक तलविहीन गड्ढे में फेंक दिया गया था, लेकिन उसके विपरीत आपने हमको इसमें से निकालने के लिए सब कुछ किया।
हमें इतिहास में ऐसा कोई भी नहीं मिलता है जो दिल और दिमाग से आपकी बराबरी कर सके, जो केवल हमारे वर्गों की सेवा के मामले में आपके जितना उदार हो, हमारे लिए अपनी जेब हमेशा खुली रखता हो और अपना पूरा जीवन और ऊर्जा हमारे हित को समर्पित करता हो। हम अपने हृदय के उद्गारों को शब्दों में नहीं व्यक्त कर सकते और अपनी भावनाओं का प्रकटीकरण नहीं कर सकते। यह कहना इस बात के लिए पर्याप्त होगा कि यदि पृथ्वी पर कोई जीवित भगवान है तो वह आपके रूप में प्रकट हुआ है। हम पुनः आपको अपना हार्दिक आभार प्रस्तुत करते हैं और आपके लंबे जीवन की कामना करते हैं, ताकि इस पृथ्वी पर आपका मिशन पूरा हो सके।
हम हैं, आपके सर्वाधिक कृतज्ञ और समर्पित अनुयायी,
अखिल भारतीय दलित वर्ग सम्मेलन की स्वागत समिति के अध्यक्ष और
सदस्य
नागपुर,
20 जुलाई, 1942