264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस मानपत्र का जवाब देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहाः
‘‘देवियों और सज्जनों, मैं इस मानपत्र के लिए आपका धन्यवाद करता हूं।
मुझे आश्चर्य है कि इस प्रकार का कोई मानपत्र क्या आवश्यक था। टोस्टों और मानपत्रों का उनके पीछे एक विचित्र इतिहास रहा है, किसी भी कीमत पर टोस्ट का तो रहा ही है। अंग्रेजी समाज में राजा के स्वास्थ्य के लिए शराब पीने का समारोह सिविल वार के बाद और पुनर्स्थापना की अवधि के दौरान आया। मूल रूप से यह एक बाध्यकारी मामला था और उन अंग्रेजी रेजीमेंटों के खिलाफ बलपूर्वक लागू किया जाता था जो राजा के विरुद्ध विद्रोह करते थे। यह नए राजा के प्रति वफादारी को लागू करने के लिए किया जाता था और उनको राजा के स्वास्थ्य के लिए पीने के वास्ते बाध्य किया जाता था। अब राजा के स्वास्थ्य के लिए पीना एक सर्वव्यापी प्रक्रिया बन गई है और कोई भी इसके उद्गम के बारे में चिंता नहीं करता है। इसका उद्गम, जैसाकि मैंने आपको बताया अपने आपको सिद्ध करने के लिए संदेहजनक वफादारी को बाध्य करने की इच्छा में निहित था। मैं जानता हूं आपकी वफादारी संदेहजनक नहीं है और मुझे ये सोचना चाहिए था कि इस प्रकार के मानपत्र द्वारा ऐसी कृपा करना अनावश्यक था। अब क्योंकि आप मुझसे इसे स्वीकार करने का आग्रह कर रहे हैं, तो मैं आपके द्वारा मेरे प्रति दर्शाए गए प्यार और लगाव की भावनाओं के प्रतीक के रूप में इसका स्वागत करता हूं। यह मेरे द्वारा अछूतों के लिए किए गए कार्यों के संबंध में आपकी प्रशंसा का प्रतीक है। यह मानपत्र इस बात को सिद्ध करता है कि मैंने भारतीय राजनीति को भारत में अछूतों के नाम पर स्वीकार किया है। हमारा आदर्श इस बात के लिए महत्व प्राप्त करना है कि हमें हिंदुओं और मुस्लिमों के साथ इस देश में सरकार चलाने के लिए सम्माननीय भागीदार माना जाए - ऐसे सहभागी जोकि सम्माननीय और समान शर्तों पर हों। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि में उन आदर्शों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करूंगा जो हमने अपने लिए निर्धारित किए हैं।
आपको मुझसे इस संबंध में आश्वासन प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है कि मैं इस आदर्श के लिए लड़ाई लड़ूंगा। इस संबंध में मुझे आपके आश्वासन की अधिक आवश्यकता है। आपने मुझे अपने प्यार और लगाव का आश्वासन दिया है। यह अनावश्यक था। मैं दूसरी प्रकार का आश्वासन चाहता हूं। यह आश्वासन शक्ति, एकता और दृढ़ निश्चय का है जोकि हमारे अधिकारों, हमारे अधिकारों संबंधी लड़ाई के लिए हो और तब तक वापस न माना जाए जब तक हम अपने अधिकारों को जीत न लें। मैं अपना कार्य करने का वादा करता हूं। न्याय हमारी ओर है और