272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
से करता हूं, और जब मैं ऐसी सभा को देखता हूं तो मुझे विश्वास और प्रसन्नता दोनों ही होती हैं कि हमने प्रगति की है। मैं आपको कुछ बातें बताना चाहूंगा जोकि मैं समझता हूं कि आपको अपने मस्तिष्क में रखनी चाहिए।
साथ रहना सीखें; सभी बुराइयों से दूर रहें। अपने बच्चों को शिक्षा दें। उनमें महत्वाकांक्षा पैदा करें। उनके मस्तिष्क में यह बात भरें कि उन्हें महान बनना है। उनके मन से सभी प्रकार की हीन भावनाओं को निकाल दें। विवाह करने की जल्दी न करें; विवाह एक जिम्मेदारी है। आपको इसे अपने बच्चों पर नहीं थोपना चाहिए जब तक कि वे विवाह से उत्पन्न होने वाले दायित्वों को पूरा करने में वित्तीय रूप से सक्षम न हो जाएं। जो विवाह करेंगे उन्हें अपने मस्तिष्क में यह बात रखनी चाहिए कि अधिक बच्चे उत्पन्न करना एक अपराध है। अभिभावकों का सबसे बड़ा कर्तव्य इसमें निहित है कि वे प्रत्येक बच्चे को उसके माता-पिता से बेहतर शुरुआत दें। सबसे बढ़कर विवाह करने वाली प्रत्येक लड़की को उसके पति के साथ खड़ा होने दें, उसे पति का मित्र होने का दावा करने दें और उसके समान होने का दावा करने दें, और उसकी दासी होने से इंकार करने दें। मुझे विश्वास है कि यदि आप इस सलाह का अनुसरण करेंगे तो आप अपने लिए और दलित वर्गों के लिए सम्मान और गौरव लेकर आएंगे।
श्रीमती कीर्तिबाई पाटिल, अध्यक्ष, स्वागत समिति ने धन्यवाद दिया। इसके पश्चात् अध्यक्ष ने सत्र को समाप्त घोषित किया। ख्1,
1 रिपोर्ट ऑफ डिप्रेस्ड क्लासेज कांफ्रेंस, नागपुर सत्र जुलाई, 1942