77. 20.7.1942 मैं अहिंसा और दब्बूपन के बीच अंतर करता हूं। - Page 297

276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय संकल्प संख्या 3

अगला सत्रः

अध्यक्ष ने अध्यक्ष पद से निम्नलिखित संकल्प प्रस्तुत किया।

  1. यह कि यह संकल्प किया जाता है कि दूसरे अखिल भारतीय समता सैनिक दल सम्मेलन का स्थान पंजाब में होगा जब वहां अखिल भारतीय दलित वर्ग सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

कोई विरोध नहीं। मैं इस संकल्प को सर्वसम्मति से पारित घोषित करता हूं।

अब मैं माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर से सम्मेलन को संबोधित करने का अनुरोध करता हूं।

जब माननीय डॉ. अम्बेडकर बोलने के लिए खड़े हुए तो उनका जोरदार अभिनंदन किया गया।

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समता सैनिक दल को डॉ. अम्बेडकर द्वारा दिए गए भाषण का सार निम्नानुसार हैः

मैं मध्य प्रांत में स्वैच्छिक सैनिकों के इस विशाल संगठन को देखकर बहुत प्रसन्न हूं। ये स्वैच्छिक सैनिक दल सर्वप्रथम वर्ष 1926 में बंबई में प्रारंभ किया गया था। समता सैनिक दल हमारे सामान्य आंदोलन का एक अविभाज्य हिस्सा है। वास्तव में यह एक शक्तिशाली साधन है। हमारे आंदोलन के लक्ष्य और उद्देश्य पूर्ण रूप से परिवर्तित हो चुके हैं। एक ऐसा समय था जब हमारा उद्देश्य अपने लोगों के लिए हिंदू समाज में समानता का स्थान प्राप्त करना था। आज हम भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक विशिष्ट और पृथक तत्व के रूप में हिंदुओं के साथ समानता चाहते हैं। हमारे आंदोलन के उद्देश्यों और लक्ष्यों में परिवर्तन के साथ-साथ समता सैनिक दल के लक्ष्य और उद्देश्य भी बदल गए हैं। जिस बात ने इस स्वैच्छिक संगठन के गठन के लिए प्रेरित किया वह थी हमारे आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अर्थात् हिंदुओं के साथ सामाजिक समानता के लिए दलित वर्गोंं के बीच मांग को प्रेषित करना। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट होता है इस संगठन की स्थापना दलित वर्गों के लिए हिंदू समाज में एक समानता का स्थान पाने के दृष्टिकोण से हिंदू समाज के पुनर्गठन के लिए की गई थी। आज इसका उद्देश्य हिंदुओं से बिल्कुल पृथक