77. 20.7.1942 मैं अहिंसा और दब्बूपन के बीच अंतर करता हूं। - Page 298

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होकर हिंदुओं के साथ समानता प्राप्त करना है। हम धर्म के संबंध में अलग होकर इसे प्राप्त करने की आशा करते हैं। हमें कई चरणों से गुजरना होगा। हमें अपने संघर्ष की शुरुआत राजनैतिक पृथकता मांगकर राजनीतिक समानता की मांग के साथ शुरू करनी होगी। यह सबसे कठिन कार्य था क्योंकि दलित वर्ग ऐसा कोई सुरक्षित मंच नहीं पा सके थे जहां से अपनी राजनीतिक मांगों को हवा दे सकें। एक ऐसा भी समय था जब यह बिल्कुल असंभव था। कांग्रेस संगठन इतना प्रभावी हो चुका था कि बंबई शहर में वह किसी और पार्टी को राजनैतिक बैठक भी नहीं करने देता था। कांग्रेस के स्वयंसेवक आकर ऐसी बैठकों को समाप्त कर दिया करते थे। किसी में भी कोई सभा करने का साहस नहीं था। इस संकट से निपटने के लिए हमने स्वयंसेवकों के मूल कर्तव्यों में एक नया कार्य जोड़ दिया और वो था राजनीति में भाग लेना तथा हमारे मंच को कांग्रेस स्वयंसेवकों के क्रियाकलापों से होने वाले व्यवधान को रोकना और उसकी सुरक्षा करना। यह कांग्रेस के स्वयंसेवकों से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका था। मुझे बंबई में हुई घटना अच्छी तरह से याद है जब मैं पहले गोलमेज सम्मेलन के लिए जा रहा था। कांग्रेस ने बंबई में, जहां मैं रह रहा था, दलित वर्गों के नाम पर एक आम सभा की, उनका उद्देश्य गोलमेज सम्मेलन में मेरे जाने की निंदा करना था और यह घोषित करना था कि मैं दलित वर्गों का सही प्रतिनिधि नहीं हूं। मैंने इस सभा के आयोजकों को बता दिया कि मैं किसी भी पारित किए जाने वाले संकल्प के विरुद्व नहीं हूं बशर्ते कि यह बैठक दलित वर्गों की हो और उनकी बैठक दलित वर्गों की बैठक नहीं थी। उन्होंने अपनी पूर्व-निर्धारित कार्रवाई को रोकने से मना कर दिया। शाम को यह बैठक आयोजित की गई। हमारे स्वयंसेवक समूह में आए और उन्होंने कांग्रेस के स्वयंसेवकों को पछाड़ते हुए इस बैठक पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस के लोग कुर्सी, मेज और घंटी आदि छोड़कर अपनी जान बचाकर भाग गए। उन चीजों को हमारे कार्यकर्ता एक ट्राफी के रूप में ले आए। हमारी स्वयंसेवक सेना बंबई में सबसे मजबूत है। कोई भी हमारे स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं को चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता। यदि हम किसी के द्वारा परेशान हुए बिना अपने राजनैतिक क्रियाकलापों को कर लेते हैं तो इसका कारण हमारे स्वैच्छिक संगठन की शक्ति है। हम इनके बहुत ही कृतज्ञ हैं।

आपने बंबई से यह विचार प्राप्त किया होगा। लेकिन मैं देखता हूं कि आपने, अपने संगठन की विशालता में बंबई को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है। इस संबंध में मैं आपकी प्रशंसा करता हूं। बंबई को आपके स्तर पर आने के लिए अपने आपको जगाना होगा। मैं स्पष्ट रूप से उस स्वैच्छिक कार्यकर्ता संगठन की आवश्यकता पर विश्वास रखता हूं। उसे केवल बनाए रखना ही नहीं है बल्कि उसे प्रत्येक प्रांत में प्रारंभ किया जाना चाहिए और इसका इतना विस्तार किया जाना चाहिए कि दलित