77. 20.7.1942 मैं अहिंसा और दब्बूपन के बीच अंतर करता हूं। - Page 299

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वर्गों का प्रत्येक युवक इसका सदस्य हो।

कुछ लोग ऐसे हैं जो ऐसे स्वैच्छिक संगठनों पर आपत्ति करते हैं। वे अहिंसा में विश्वास रखते हैं और वे ऐसे संगठनों और शक्ति प्रदर्शन पर आपत्ति करते हैं। मैं स्वयं भी अहिंसा में विश्वास करता हूं। लेकिन मैं अहिंसा और दब्बूपन में भेद करता हूं। दब्बूपन कमजोरी है और वह कमजोरी जो अपने आप स्वेच्छा से अपने ऊपर लाद ली जाए, कोई गुण नहीं है। किसी उपनिषद में एक मेमने की कहानी है जो भगवान के पास गया और एक शिकायत दर्ज कराई कि वह सभी प्राणियों का पिता है और इसलिए सभी प्राणी आपस में भाईबंधु हुए। मेमने ने कहा कि इन सब बातों के होते हुए भी प्रत्येक प्राणी सभी प्रकार के भाईचारे को भूलकर उसके जीवन को खतरे में डाल रहा है। मेमने ने भगवान से पूछा कि आप इसको कैसे स्पष्ट करोगे? भगवान ने बहुत ही उपदेशात्मक उत्तर दिया। भगवान ने कहा कि तुम इतने दब्बू दिखाई देते हो कि मुझे भी तुम्हें खाने की इच्छा होती है। हम भी इस कहानी के मेमने के समान हैं और इसीलिए सभी हमको समाप्त करने की धमकी देते हैं। मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि स्वतः लादी गई कमजोरी के रूप में दब्बूपन कोई गुण नहीं है। मैं अहिंसा में विश्वास रखता हूं लेकिन महान संत तुकाराम के द्वारा दी हुई परिभाषा के अनुसार। अहिंसा में दो बातें होती हैंंः (1) सभी प्राणियों के लिए प्यार और दया, और (2) सभी गलत काम करने वालों का विनाश। अहिंसा की इस परिभाषा का दूसरा भाग अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है और चूंकि यह अनदेखा हो जाता है इसलिए अहिंसा का सिद्धांत इतना हास्यास्पद हो जाता है। अहिंसा के सिद्धांत में सभी गलत कार्य करने वालों को समाप्त करना मुख्य तत्व है। इसके बिना अहिंसा एक खोखला आवरण है। अब यह एक सकारात्मक दायित्व नहीं रह गया है। जब तक हमें किसी का भी नुकसान करने की मंशा नहीं होगी और जब तक हम अपने आपको गलत कार्य करने वालों के विनाश तक सीमित रखेंगे तब तक कोई भी हमें हमारी शक्ति बढ़ाने से रोक नहीं सकता। विवेकपूर्ण शक्ति हमारा आदर्श है। आपको किसी आलोचना से डरने की आवश्यकता नहीं है। किसी को भी अवांछित क्षति न पहुंचाएं और जिसको सहायता की आवश्यकता हो उस प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करें और इस प्रकार आप हमारे लोगों की महान सेवा करेंगे। अब से आपका मुख्य क्रियाकलाप हमारे राजनैतिक जीवन को बनाए रखना है। ऐसे अन्य और भी क्षेत्र हैं जहां आप अपने क्रियाकलाप बढ़ा सकते हो। नगरों में यह अक्सर सुनने में आता है कि महिलाओं का कुछ दुष्टों द्वारा अपहरण कर लिया जाता है। गांवों में अक्सर यह सुना जाता है कि हिंदू जाति के लोग हमारे लोगों पर निरंकुशता का प्रयोग करते हैं। ये ऐसे मामले हैं जिनके विरुद्ध आपको