10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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रत्नागिरी जिला किसान सम्मेलन 14 अप्रैल, 1929 को चिपलून में हुआ। बम्बई से अतिथियों में देवराव नायक, डी.वी. प्रधान, बी.आर. काडरेकर, शंकरराव गुप्ते, शंकर वडवाल्कर, शिवतारकर, बाबा आदरेकर, गायकवाड़, मोरे इत्यादि थे व चिपलून के गणमान्य लोग सर्वश्री विनायक राव बर्वे, साठे, राजाध्यक्ष, खानसाहिब देसाई, बेंडके, शिवराम जाधव, उपस्थित थे। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अधिवेशन की अध्यक्षता की। ख्1,
डॉ. अम्बेडकर ने भाषण देते हुए लोगों से कहा-
’’उन्हें अब विश्वास हो चला है कि उनका जीवन दलितों के कल्याण के लिए ही है।’’ उन्होंने कहा कि वे एक निर्धन परिवार से हैं और वे गरीबों के बीच बम्बई के सुधार न्यास के द्वारा बनाई गई खोली में रहे है। डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा, ‘‘मैं आपके कष्टों को जानता हूं। यह खोती व्यवस्था आपका खून चूस रही है। यह व्यवस्था जिसमें कृषक को सीमित अवधि के लिये जमीन पट्टे का अधिकार मिलता है समाप्त किया जाना चाहिए। इसके समाप्त होने से आप को शांति मिलेगी व प्रगति होगी। अपनी निर्णायक मंजिल तक पहुंचने के लिए आपको आन्दोलन जारी रखना होगा। आने वाले चार या पांच वर्षों में हम पूर्णतया अपने भाग्य व भविष्य निर्माण के निर्णय लेने में सक्षम होंगे। उस समय आप सबको विशेषतया यह ध्यान देना होगा कि अपने प्रतिनिधियों का चुनाव पूरी समझ से करें और विधायिकाओं में ऐसे प्रतिनिधियों को भेजें जो पूर्ण भक्ति व निष्ठा से खोती व्यवस्था को समाप्त करने में संघर्ष के लिए समर्पित हों।’’ ख्2,
12 (’’बहिष्कृत, भारत’’ 3 मई, 1929) कीर, पृष्ठ 128-129