5. 8.8.1930 एक देश, एक संविधान एक और भाग्य की भावना से जुड़े लोग स्वाधीन होने का जोखिम उठाते हैं। - Page 32

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एक देश, एक संविधान और एक भाग्य की भावना से जुड़े

लोग स्वाधीन होने का जोखिम उठाते हैं

साइमन आयोग (कमीशन) की रपट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए, योजनाबद्ध तरीके से अछूतों के भविष्य के लिए राजनीतिक अधिकारों के बारे में जांच करना व निर्णय लेना अति आवश्यक था। इसके अतिरिक्त लन्दन में होने वाली गोलमेज़ अधिवेशन के लिए अछूतों के प्रतिनिधियों के नामांकन भी करने थे जिसमें भविष्य के भारतीय संविधान की रूप रेखा पर चर्चा होनी थी।

भारत के भविष्य का निर्णय लेते समय यह अति आवश्यक था कि सात करोड़ अछूतों के राजनीतिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उचित प्रतिनिधत्व हो। इसके लिए एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन बुलाने की आवश्यकता थी और यह सम्मेलन नागपुर में हुआ। इस ऐतिहासिक घटना का श्रेय नागपुरवासियों को जाता है।

स्थानीय अछूत नेतागण विशेषकर दशरथ लक्ष्मण पाटिल और लक्ष्मण राव ओगले विधायक इस विषय पर डॉ. बी.आर. अम्बेडकर से चर्चा के लिए बम्बई गये। उन दोनों ने अपनी इच्छा जताई कि वे डॉ. अम्बेडकर की अध्यक्षता में सम्पूर्ण भारत दलित वर्ग महासम्मेलन नागपुर में रखना चाहते हैं। डॉ. अम्बेडकर ने इस पर स्वीकृति जताई व सम्मेलन के लिए 8 और 9 अगस्त, 1930 के बारे में सहमति हुई। स्वागत समिति का, श्री टी.सी.साखरे, सभापति, श्री दशरथ लक्ष्मण पाटिल, बेला उप-सभापति, श्री विश्राम जी सवायथूल कोषाध्यक्ष, श्री एल.के. ओगले, विधायक अमरावती, श्री हरदास एल.एन., काम्पटी, श्री पी.के. भाटकर, अमरावती; श्री श्यामराव जी राहटे, वड़गांव; श्री एच.टी.बेहाड़े, मातंग समुदाय के नेता नागपुर का सचिवों के पदों के साथ गठन हुआ।

सम्मेलन सचिव श्री हरदास एल.एन. ने श्री शिवराम जानबा काम्बले पूना से निवेदन किया कि प्रस्तावित अखिल भारतीय सम्मेलन नागपुर में बुलाये गये विशिष्ट अतिथियों के नाम व सभापति के नाम सूचित करें।

यह पत्र इस प्रकार थाः