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अधिकारों की अपनी लड़ाई लड़ने के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमने जो पक्ष रखा है, यह है कि संविधान त्रिपक्षीय हो। यह ऐसा संविधान हो जो देश में राष्ट्रीय जीवन में स्वतंत्र, स्वाधीन और महत्वपूर्ण तत्वों द्वारा नियंत्रित हो और कार्यान्वित हो। हम यह नहीं चाहते कि हिंदू और मुसलमान, अनुसूचित जातियों को असहाय छोड़कर, स्वयं राजनीतिक प्रगति के लिए समझौता करने की दिशा में अग्रसर हों। इसलिए हम एक एकल संगठन बनाना चाहते हैं, जैसे अखिल भारतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन, जो पूरे देश में दलित वर्ग की इस विशिष्ट राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने में एक अकेली जीवंत संस्था के रूप में काम करे।’’
तकनीकी प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि कोई भी राष्ट्र ‘औजार युक्त कारीगर’ के बिना तरक्की नहीं कर सकता। इसके अलावा, तकनीकी प्रशिक्षण का देश के औद्योगिक विकास में उज्ज्वल भविष्य है। ख्1,
1 द टाइम्स ऑफ इडिया, 10 मई, 1943