292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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युद्धोत्तरकाल में गरीबी सहन नहीं की जाएगी
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 10 मई, 1943 (सोमवार) को दोपहर बाद महाराष्ट्र
चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, ‘युद्धोत्तर काल में
गरीबी सहन नहीं की जाएगी’ हालांकि वह यह भविष्यवाणी नहीं कर सकते थे कि
भविष्य में क्या स्थिति होगी, फिर भी उन्हें पक्का विश्वास था कि हालात इतने आमूल
चूल बदल जाएंगे कि युद्धोत्तरकाल में गरीब लोग एक सुसंस्कृत और सभ्य जीवन
जी पाएंगे। उनके अनुसार स्थायी शांति की समस्या तीन तत्वों के सफल समाधान
पर निर्भर है - साम्राज्यवाद, रंग-भेद, और गरीबी। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवाद
अब एक घिसापिटा शब्द बन गया है। रंग-भेद का प्रश्न उनके अनुसार, उतना ही
महत्वपूर्ण है जितना साम्राज्यवाद का प्रश्न, उससे इस ढंग से जूझना और सुलझाना
होगा कि भविष्य में मानव जाति की शांति भंग न हो।
डॉ. अम्बेडकर को महाराष्ट्र चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री एम.एल.
दहानुकर द्वारा सोमवार शाम ताज महल होटल में चाय पर आमंत्रित किया गया। ख्1,
1 दि बम्बई क्रानिकल, 11 मई, 1943