298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चलेगा। समझौता त्रिपक्षीय होना चाहिए। इस प्रकार राजनीतिक सत्ता के हस्तांतरण के लिए ‘अनुसूचित जातियों के समुदाय से समझौता’ एक पूर्व शर्त बना ली गई थी। उन्हें इस प्रकार की घोषणा के लिए बहुत कृतज्ञ होना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि यदि हिंदू महासभा अनुसूचित जातियों की उचित मांगें मानने को तैयार हो, तो वह निश्चय ही ‘महासभा’ में शामिल हो जाएंगे। यदि कांग्रेस उनकी मांगें मानने को तैयार हो तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हाने में भी कोई संकोच नहीं होगा।
लेकिन प्रश्न यह है कि क्या ये संगठन अनुसूचित जातियों के मित्र हैं या शत्रु! ख्1,
1 द बंबई क्रानिकल, 28 अगस्त, 1944