90. 20.9.1944 दलित वर्ग हिंदू समाज का अंग नहीं है। - Page 320

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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, सदस्य, वायसराय कार्यकारी-परिषद 20 सितंबर, 1944 को दोपहर बाद मद्रास एक्सप्रेस द्वारा बम्बई से हैदराबाद जा रहे हैं। कई दलित वर्ग के नेता भी उनके साथ जाएंगे।

ज्ञात हुआ है कि हैदराबाद में एक दिन रुकने के बाद डॉ. अम्बेडकर मद्रास के लिए रवाना हो जाएंगे। वहां जाकर वह भारत के भावी संविधान के अंतर्गत दलित वर्गों की स्थिति पर एक बहुत महत्वपूर्ण उद्घोषणा करेंगे।

माना जाता है कि वह उद्घोषणा गांधी-जिन्ना वार्ता के परिणामों पर आधारित होगी। ख्1,

जब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर दक्षिण भारत के दौरे पर थे तो 20 सितंबर 1944 को पहली बार निज़ाम के हैदराबाद प्रान्त में गए थे। नामपल्ली और सिकन्दराबाद में उनका भव्य तथा भावपूर्ण स्वागत हुआ। डॉ. अम्बेडकर जब बेगमपेठ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे, तो श्री जे. एच. सुबय्या, अध्यक्ष, अनुसूचित जाति फेडरेशन, हैदराबाद प्रांत, श्रीमती सुबय्या, श्रीमती राजमणी देवी तथा श्री माद्रे ने उनका स्वागत किया।

अनुसूचित जाति फेडरेशन, हैदराबाद के स्त्री-पुरुषों द्वारा उत्साहपूर्ण स्वागत किए जाने के कारण उनका यह दौरा स्मरणीय बन गया। महिला स्वयंसेवकों द्वारा डॉ. अम्बेडकर को दिया गया सम्मान इतना भव्य था कि वायसराय को भी ऐसा सम्मान कभी प्राप्त नहीं हो सका थ। सारा वातावरण ‘‘अम्बेडकर जिन्दाबाद’’ के नारां से गूंज उठा था। सबसे पहले डॉ. अम्बेडकर को एक जुलूस में सिकन्दराबाद रेलवे स्टेशन से ‘पांच बंधु सेवा हाल’ और फिर एक विशाल पंडाल में ले जाया गया जहां समारोह संपन्न हुआ। इस मौके पर स्वागत समिति के प्रमुख, प्रेम कुमार ने डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का स्वागत किया और अनुसूचित जाति फेडरेशन की ओर से श्री जे.एच. सुबय्या ने डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को मानपत्र भेंट किया।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर करतल ध्वनि के बीच बोलने के लिए खड़े हुए। वह

12 द बंबई क्रानिकल, 20 सितंबर, 1944 कांबले, बी.सी. समग्र अम्बेडकर चरित्र (मराठी) जिल्द 17, पृष्ठ 66-67