5. 8.8.1930 एक देश, एक संविधान एक और भाग्य की भावना से जुड़े लोग स्वाधीन होने का जोखिम उठाते हैं। - Page 33

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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कार्यालयः विश्राम हाल,

लकड़गंज सर्कल 15/10

नागपुर शहर

1 फरवरी, 1930

स्वागत समिति सभापति ः के.जी. नन्दागावली

उप-सभापति ः डी.एल. पाटिल

कोषाध्यक्ष ः वी. एस. सवायथूल

सचिव ः एल.के. ओगले, विधायक, एल.एन. हरदास

पी.के. भाटकर, एच.डी. बेहड़े सेवा में,

श्री एस. जे. काम्बले *

पूना

प्रिय महोदय,

आपको विदित ही है कि भविष्य के राजनीतिक भारतीय संविधान के विषय पर प्रस्तावित लन्दन में गोल मेज अधिवेशन आगामी शरद् ऋतु में होना तय है। मुझे आपकी सहमति का पूरा भरोसा है कि दलित वर्गों को इस विकट क्षण में अपना दावा पेश करना चाहिए और उन सब शक्तियों को जो भविष्य के भारतीय संविधान को प्रभावित कर सकने व निर्णय लेने में सक्षम हैं को यह बातें स्पष्ट कर दें कि अछूतों को कौन से नागरिक अधिकार देने से उनका संरक्षण व बचाव हो सकता है। इस प्रकार के महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए हमारे लोगों का ध्यानाकर्षण करने की तुरंत आवश्यकता है। देश के सभी प्रदेशों से लोगों का प्रतिनिधित्व जुटाने के लिए, जिससे सबके विचारों व भावनाओं को सुना व समझा जा सके, हमने डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, एम.ए., पी.एच.डी., डी.एस.सी., बार-अैट-ला, विधायक बम्बई की सहमति से अखिल भारतीय दलित वर्ग कांग्रेस का सम्मेलन किसी भी समय ‘‘साइमन आयोग’’ की रपट छपने के तुरन्त बाद आयोजित करना निश्चित किया है और आपकी स्वीकृति की प्रत्याशा में स्वागत समिति गठित की है।

* शिवराम जानबा काम्बलेः- पूना के एक अतुलनीय विशिष्टता प्राप्त अछूतों के नेता जिन्होंने भारतीय सत्र का अछूतों का

पहला अधिवेशन आयोजित किया। अम्बेडकर काल से पहले युग के नेता, ‘‘सोमवंशीय मित्र’’ पूना के संपादक रहे व

इन्होंने ब्रिटिश सरकार को 1910 में अछूतों में जागरूकता व उनके उद्धार के लिए चेताने हेतु ज्ञापन भेजा।