90. 20.9.1944 दलित वर्ग हिंदू समाज का अंग नहीं है। - Page 321

300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हिंदी में 45 मिनट बोले। उन्होंने अपने प्रभावकारी भाषण से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी भाषा ने लोगों के दिलों को छू लिया। उन्होंने सभी उपस्थित जनों से अपील की कि वे सब अनुसूचित जाति फेडरेशन के ध्वज तले संगठित हों। ख्2,

धमकी मिलने पर भी अडिग डॉ. अम्बेडकर ने कहा, यदि अनुसूचित जातियों के लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं हुआ और उनके अधिकारों तथा विशेषाधिकारों को उचित मान्यता नहीं मिली, तो जरूरत पड़ने पर वे लोग अपने प्राणों की बलि देकर भी अपनी लड़ाई लड़ेंगे। डॉ. अम्बेडकर ने साफ कहा कि यदि राजनीतिक सत्ता किसी की होगी तो वे तीन पक्ष होंगे-हिंदू, मुस्लिम और अनुसूचित जातियाँ। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि कोई भी उन्हें उनकी आधिकारिक स्थिति से वंचित नहीं कर सकता।

दूसरे गोलमेज सम्मेलन का स्मरण करते हुए, डॉ. अम्बेडकर ने विचार प्रकट किया कि गांधी को प्रथम गोलमेज सम्मेलन के समय विभिन्न पार्टियों की रणनीति और युक्तियों की कोई जानकारी नहीं थी। अतः वह इस बात के लिए चिंतित थे कि उन्हें गांधी को भावी स्थिति के बारे में चेतावनी दे देनी चाहिए। डॉ. अम्बेडकर ने कहा, इस विषय पर वह फेडरल स्ट्रक्चर उप समिति के समक्ष पहली बार बोले ताकि वह सारी स्थिति का खुलासा कर सकें। उनके कुछ समय बाद गांधी जी बोले, ‘‘मेरा दिल डॉ. अम्बेडकर के साथ है, लेकिन मेरा मस्तिष्क उनके साथ नहीं है।’’ अगली प्रातः सम्मेलन की कार्यवाही प्रारंभ होने से पहले उन्होंने गांधी जी के सामने कुछ प्रश्न रखे। वे प्रश्न ही उनके बीच झगड़े का कारण बने। उन्होंने गांधी जी के समक्ष सवाल उठाए - क्या गांधी को इस कथन के समर्थन में कांग्रेस से कोई आज्ञा मिली है कि वे नामांकन द्वारा भारतीय राजाओं के प्रतिनिधित्व का स्वागत करेंगे, और क्या कांग्रेस अप्रत्यक्ष निर्वाचन के विरुद्ध नहीं है जिसके लिए गांधी ने कहा था कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, और क्या ‘होमरूल बिल’ कांग्रेस द्वारा इसी कारण नामंजूर नहीं किया गया था। श्री गांधी ने इन प्रश्नों का उत्तर देने से इंकार कर दिया।

डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा, ‘‘इन सब बातों के द्वारा मैं इस मुद्दे को सामने लाना चाहता हूं कि यदि भारत को झुकना पड़ा है तो वह मेरे कारण नहीं, अनुसूचित जातियों के कारण नहीं, बल्कि वह श्री गांधी और श्री श्रीनिवास शास्त्री तथा दूसरे लोगों के कारण हुआ है। डॉ. अम्बेडकर ने आगे विचार प्रकट किया-

‘‘ज्यादा बेहतर होगा कि सवर्ण हिंदू इस बात को समझ लें कि अनुसूचित जातियां भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक पृथक तत्व हैं। हम उनसे पूरी तरह सहमत हैं कि इस देश को आजादी मिलनी चाहिए। लेकिन जो भी नई सरकार अर्थात्