91. 20.9.1944 मैं राष्ट्रवाद का विरोधी नहीं हूं, किंतु .... - Page 324

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मद्रास नगर निगम ने 22 सितंबर, 1944 (शुक्रवार) को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार का नागरिक अभिनंदन करने का निश्चय किया था। समारोह रिपन भवन में आयोजित किया गया।

मुख्य अतिथि का स्वागत, महापौर, आयुक्त और पार्षदों द्वारा किया गया। उसमें विशाल जनसमूह ने भाग लिया। कांग्रेस प्रमुख पार्टी के सदस्य उसमें जानबूझकर अनुपस्थित रहे।

अभिनन्दन पत्र का वाचन महापौर डॉ. सय्यद निजामतुल्लाह द्वारा किया गया और एक सुंदर चांदी की मंजूषा में भेंट किया गया। डॉ. अम्बेडकर का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया और उपस्थित पार्षदों से परिचय कराया गया। ख्1,

अपने अभिनन्दन के उत्तर में डॉ. अम्बेडकर ने कहाः

‘‘इस देश का शासक वर्ग ब्राह्मण समाज है। 1937 के चुनावों में सात प्रांतों में ब्राह्मण प्रधानमंत्री बने और कुल मंत्रियों में आधे मंत्री, ब्राह्मण थे। यदि राष्ट्रीय सरकार बनी और यदि वह शासक वर्ग के हाथ में चली गई तो क्या आप लोग वास्तव में यह सोचते हैं कि वह सरकार,वर्तमान भारत सरकार से, जिसकी इतनी अधिक आलोचना होती है, बेहतर काम करेगी?

‘‘आपका अपने शहर में अभिनन्दन पत्र भेंट करने का फैसला करने का विचार बहुत कृपापूर्ण रहा। मैं मद्रास का निवासी नहीं हूं, और मैंने नागरिक जीवन में कोई भूमिका अदा नहीं की है, इसलिए आपके इस सम्मान पर मेरा कोई अधिकार नहीं है। फिर भी आपने मुझे यह मानपत्र भेंट करने का फैसला किया, मैं हृदय से कृतज्ञ महसूस करता हूं क्योंकि यह एक ऐसी चीज है जिस पर मैं कोई हक नहीं जता सकता। क्या मैं इस तथ्य का हवाला दे सकता हूं और किसी विवाद या आलोचना की भावना के बिना ऐसा कर रहा हूं, क्योंकि मैंने समाचार-पत्रों में पढ़ा है कि मेरे इस अभिनन्दन पर आम सहमति नहीं थी और कुछ लोगों की इस पर असहमति थी (हंसी)? मैं इसका उल्लेख इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मैं यह महसूस

1 खैरमोडे,़ खंड 9, पृष्ठ 337