304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
करता हूं कि मुझे इस अभिनन्दन का स्वागत उससे भी अधिक करना चाहिए, जो मैं तब करता जब अभिनन्दन सर्वसम्मति से होता। जो काम हम सर्वसम्मति से करते हैं उसमें से ज्यादातर या तो औपचारिक होते हैं या ऐसे कृत्य होते हं जो ‘सभ्यता के पारम्परिक असत्य वचनों’ से अधिक कुछ नहीं होते। हम हर रोज ऐसा करते हैं, जिसका कोई अर्थ नहीं होता (करतल ध्वनि)। जो भी हो यह इस बात का संकेत है कि इसमें परस्पर सहयोग की भावना थी, जो मुझे अभिनन्दन पत्र भेंट करने के लिए सच्ची और साग्रह थी।
‘‘मेरे विश्वविद्यालयी कैरियर, शिक्षक, वकील और बम्बई विधान परिषद के सदस्य के नाते मेरे कार्यों का उल्लेख ऐसे शब्दों में किया, जो मेरे विचार में कुछ फिजूल बातें हैं। आइए, मैं आपको आश्वस्त कर दूं कि मैं इतना विचारशून्य नहीं हूं, जो यह मान लूं कि आपने जो कुछ कहा, मैं वास्तव में उसका अधिकारी था। मैं कहना यह चाहता हूं कि जिस भाषा का आपने इस्तेमाल किया है, वह उस महान सहानुभूति को इंगित करती है जो आपके मन में उस लक्ष्य के प्रति है जिसके लिए मैंने इतने लंबे समय तक श्रम किया है और, जो कुछ आपने कहा है, वह वास्तव में मेरे अपने व्यक्तित्व के बजाय उस लक्ष्य के समर्थन में है।
‘‘गंदी बस्तियों की सफाई, कामकाजी वर्गों के बच्चां के लिए भोजन के संबंध में मद्रास निगम के कार्यों का हवाला दिया गया। यदि मैं वह सब गिनाऊं जो भारत सरकार ने इस संबंध में किया है, तो यह उपयुक्त नहीं होगा। फिर भी केवल उस आलोचना का जवाब देने के लिए जो कभी-कभी भारत सरकार के खिलाफ की जाती है कि वह एक धीमी मशीन है और धीरे-धीरे चलती है, मैं यह कहना चाहूंगा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार एक आदर्श निकाय नहीं रही है। वह कुछ अत्यंत आवश्यक सुधारों को कार्यरूप देने के लिए समय का इंतजार करती रही है, जिसे करने के लिए प्रत्येक सरकार बाध्य होती है। किंतु मैं एक ऐसे महान कार्य की चर्चा करना चाहता हूं जो भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कामकाजी जनता के लिए किया है। मैं तकनीकी प्रशिक्षण योजना का हवाला दूंगा जिससे 60,000 लोगों को अकुशल से कुशल बनाया गया है। पूरे भारत में 300-400 प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं और हमें आशा है तथा हमारी आकांक्षा है कि तकनीकी प्रशिक्षण योजना, जिसकी स्थापना हमने की है, युद्ध समाप्ति पर बंद नहीं होगी। वह देश में शिक्षा व्यवस्था का एक स्थायी अंग होगी। इस संस्था के द्वारा श्रमजीवी वर्ग के बच्चों को, जिन्हें विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का मौका नहीं मिलता है, उन्हें बेहतर कौशल पाने का मौका मिल सकता है और इस प्रकार न कमाने की सामर्थ्य बढ़ सकती है (ंकरतल ध्वनि)। ऐसे कई विधान हैं जो सरकार ने