91. 20.9.1944 मैं राष्ट्रवाद का विरोधी नहीं हूं, किंतु .... - Page 327

306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

किया है या वह नहीं करेगी। मेरे विचार में, हम जिसे राष्ट्रीय सरकार कहते हैं वह इससे ज्यादा अच्छा काम करेगी मैं विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि हम जिस प्रश्न के बारे में सोच रहे हैं, यह प्रश्न उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। बहस की

खातिर, मैं यह मानने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हूं कि वर्तमान भारत सरकार को एक केयरटेकर (कार्यवाहक) सरकार माना जाए। हम एक नई सरकार की ओर देख रहे हैं, और मुझे जो सवाल चिंतित करता है वह यह है कि क्या वह राष्ट्रीय सरकार इससे बेहतर काम करेगी। मुझे भी कुछ आशंका है। हम सब यह कह रहे हैं कि हमें एक बार सत्ता, बालिग मताधिकार मिल जाए, हम सब बुराइयों का खात्मा कर देंगे, उनका सफाया कर देंगे, हरेक को राह पर ले आएंगे, ताकि वे मनुष्य की भांति सीधे

खड़े होकर चल सकें। मुझे घोर शंकाएं हैं। मैंने यूरोपीय सरकार के इतिहास का काफी अध्ययन किया है और मैं उन लोगों में से हूं जिन्हें इस अभिकथन के बारे में कतई भ्रांति नहीं है जो कभी-कभी किया जाता है कि एक बार बालिग मताधिकार पर आधारित संसदीय सरकार स्थापित हो जाए, तो सारी मानव बुराइयां समाप्त हो जाएंगी। इतिहास में इस प्रकार की विचारधारा के लिए कोई आधार नहीं है, जो इसे समर्थन दे। ऐसा कुछ नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि हम कुछ मोह भंगों से ग्रस्त हैं अथवा स्वयं मिथ्या प्रश्न पूछ रहे हैं। यह कहना ठीक है कि आपको बालिग मताधिकार मिले या नहीं अथवा लोकतांत्रिक सरकार हो या कोई अन्य सरकार हो, हर देश में, हर समाज में दो वर्ग होते हैं- शासक वर्ग और शासित वर्ग। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे प्रत्यक्ष हो अथा किसी प्रकार के आवरण में रहें। होता यही है, चाहे आपको बालिग मताधिकार मिल जाए या किसी भी प्रकार की शांति या चुनाव मिल जाएं। शासक वर्ग शासन करने के लिए चुना जाता है, शासित वर्ग को कभी मौका नहीं मिलता। क्या मैं काल्पनिक बात कर रहा हूं? मैं ऐसा नहीं सोचता। मैं जो कहता हूं उसका एक आधार होता है।

‘‘आइए, 1937 के चुनावों के परिणामों को देखें। हमारे पास व्यपक मताधिकार था, चुनाव परिणाम और वास्तविक वोटें थीं। सात कांग्रेस प्रांतों में क्या हुआ? मैं उसके बारे में बोलना नहीं चाहता। उस समय मैंने जो कुछ कहा था, वह सच निकला ओर वह सत्य यह था कि देश में इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करते हैं, राज तो ब्राह्मण समाज ही करेगा (हंसी), यह बात सामने आ गई। शेष कुछ नहीं हुआ। सात प्रांतों में, ब्राह्मण प्रधानमंत्री बनें। कुल मंत्रियों में से आधे मंत्री ब्राह्मण थे। मैं यह सब आलोचना की खातिर नहीं कह रहा हूं, मैं केवल तथ्य बता रहा हूं। यदि चुनावों से कुछ साबित हुआ, तो बस इतना साबित हुआ कि इस देश के दिल में एक ही समाज है, जिसे शासक वर्ग बनना है। वह शासक वर्ग के