92. 23.9.1944 एकता का महत्त्व सर्वोपरि है। - Page 329

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 23 सितंबर 1944 को श्री पी. बालासुब्रमण्य, संपादक, ‘संडे आब्जरवर’ द्वारा कन्नेमरा होटल, मद्रास में दी गई लंच पार्टी के दौरान भाषण दिया।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा-

‘‘जहां तक मैं अध्ययन कर पाया हूं, गैर-ब्राह्मण पार्टी का जन्म भारत के इतिहास में एक घटना मानी गई है। बहुत से लोग तो यह भी नहीं समझ पाए थे कि गैर-ब्राह्मण पार्टी का मूलभूत आधार साम्प्रदायिक पहलू नहीं है जैसाकि ‘गैर-ब्राह्मण’ शब्द से इंगित होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि गैर-ब्राह्मण पार्टी को कौन चलाता है - चाहे वह तथाकथित मध्यवर्ती वर्ग हो जो एक ओर ब्राह्मणों तथा दूसरी ओर अछूतों के मध्य है। यदि वह पार्टी लोकतंत्रात्मक पार्टी नहीं है, तो वह पार्टी कुछ नहीं है। इसलिए जो भी लोग लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, उन्हें पार्टी के हितों और भाग्य की बड़ी चिंता रही। गैर-ब्राह्मण पार्टी का संगठन इस देश के इतिहास में एक घटना थी। इसका पतन भी वैसी ही घटना थी, जिसे नितांत अफसोस के साथ याद किया जाएगा। 1937 के चुनावों में इस पार्टी का बुरा हाल क्यों हुआ, यह प्रश्न पार्टी के नेताओं को अपने आपसे पूछना चाहिए। आखिर, मद्रास में चुनाव से पहले दरअसल 24 वर्ष तक गैर-ब्राह्मण पार्टी का शासन रहा था। पार्टी ने क्या गलती की कि लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहने के बावजूद वह ताश के पत्तों की तरह टूटकर धराशायी हो गई? ऐसा क्या हुआ कि अधिकांश गैर-ब्राह्मणों में यह पार्टी इतनी अलोकप्रिय हो गई? मेरे मतानुसार दो बातें इस पतन के लिए जिम्मेदार हैं। प्रथम, वे यह ठीक-ठीक नहीं समझ पाए कि उनके ब्राह्मण वर्ग से क्या मतभेद हैं। यद्यपि वे ब्राह्मणों की तीव्र आलोचना करते रहते थे, फिर भी क्या उनमें से कोई भी कह सकता है कि वे मतभेद सैद्धांतिक थे? उनमें कितना ब्राह्मणत्व था? वे नवाब थे और स्वयं को दूसरी श्रेणी के ब्राह्मण मानते थे। ब्राह्मणत्व को छोड़ने के बजाए उनमें यह भावना थी कि यही आदर्श हैं जहां पर उन्हें पहुंचना चाहिए। ब्राह्मणों के खिलाफ उनका क्रोध यह था कि वे (ब्राह्मण) उन्हें केवल द्वितीय श्रेणी का मानते हैं।

‘‘कोई पार्टी ऐसी स्थिति में अपनी जड़ें कैसे जमा सकती है जब उसके अनुयायियों को यह स्पष्ट ज्ञात न हो कि वह पार्टी जिसके वे सदस्य हैं और उस पार्टी के बीच, जिसका विरोध करने के लिए उनसे कहा गया है, सैद्धांतिक मतभेद क्या हैं। इसलिए पार्टी के पतन का एक कारण था, ब्राह्मण वर्ग और गैर-ब्राह्मणों के बीच सिद्धांतों में भेद का कारण निरूपित न कर पाना। पार्टी के पतन का