314 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
से किंग जेम्स पैलेस पैदल चलकर गए थे। मेरे दोस्तो, उन्होंने वहां क्या कहा? वह उठे और बोले, ‘‘प्रिय प्रधान मंत्री, मैं चैम्पियन हूं।’’ मेरा और चिंतामणि का दिल बहुत मजबूत था, अन्यथा हम दिल का दौरा पड़ने से मर गए होते। श्री शास्त्री ने कहा कि वह फेडरेशन के पक्ष में हैं, और मेरे पीछे पडे़ रहे और मुझे बताते रहे कि मैं पक्का देशभक्त हूं और मैं हमारी योजना को उलट रहा हूं, और हम लोग शांत क्यों नहीं होते? यदि श्री गांधी निष्ठावान हैं और यदि देशी रियासतों के लोगों का हित उन्हें ज्यादा प्यारा है तो आवश्यक है कि उन्हें देशी राजाओं कि निजी शासन के अत्याचार और उत्पीड़न से बाहर निकाला जाए। वह पहले आदमी थे जिन्हें यह कहना चाहिए था कि प्रतिनिधित्व, चुनाव द्वारा होना चाहिए। श्री गांधी ने इसके बजाय यह कहा कि वह इस बात के पक्षधर हैं कि देशी रजवाड़ों के राजा अपने प्रतिनिधियों को नामित करें। मैं आप लोगों को एक बात बता दूं। एक चीज है। मैं जानता हूं श्री गांधी राजनीति के बारे में बहुत कम जानते हैं (हंसी)। मैं दोष निकालने की भावना से नहीं कह रहा हूं, मैं उनके ऊपर कोई निर्णय नहीं दे रहा हूं और न ही सस्ती तालियां बटोरने के लिए बोल रहा हूं। लेकिन मैं जानता हूं, यह सत्य है। हुआ यह था कि प्रथम गोलमेज सम्मेलन में मैं उपस्थित था। श्री गांधी को यह ज्ञात नहीं था कि मुझे बहुत-सी बातें और अड़चनें मालूम हैं। मैं जानता था कि विभिन्न पार्टियां क्या-क्या रणनीतियां और युक्तियां अपना रहीं है और मुझे बड़ी चिंता थी कि श्री गांधी के मुंह खोलने से पहले उन्हें झूठों की वास्तविकता के बारे में चेतावनी दे दी जाए, ताकि वह जान सकें कि वह क्या कहें और क्या न कहें। जब श्री गांधी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में आए थे, तो मैं भी परिसंघीय संरचना समिति (फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी) का सदस्य था। बेशक, अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधि होने के नाते मुझे अध्यक्ष लार्ड चांसलर की बगल में प्रथम स्थान नहीं मिल सका था (हर्ष ध्वनि)। व्यक्तियों के नामों के क्रम के अनुसार मैं कहीं आखिर में बैइा था। स्पष्ट है, श्री गांधी जब पहले दिन आए थे तो हमारे समझ चर्चा के लिए एक कार्यसूची रखी गई थी। मैं इस तथ्य से बहुत चिंतित था कि राजनीति में श्री गांधी के अपरिपक्व ज्ञान को ध्यान में रखते हुए तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वह प्रथम गोलमेज सम्मेलन में उपस्थित नहीं थे, मैं सबसे पहले बोलने के एक मौके के लिए लालायित था, ताकि मैं सारी स्थिति का खुलासा कर सकूं और श्री गांधी को भी जानकारी हो जाए कि स्थिति क्या है।
डॉ. अम्बेडकर ने यहां वह कहानी सुनाई कि कैसे उन्होंने लार्ड चांसलर को अपने ज्वर से पीडि़त होने के बारे में बताया था और लार्ड चांसलर से सबसे पहले बोलने की इजाजत ले ली थी। लार्ड चांसलर ने श्री गांधी से पूछा, क्या आपको कोई आपत्ति है? ‘‘श्री गांधी ने उदारता की खातिर कहा, ‘‘नहीं’’। मैं, करीब डेढ़ घंटा बोला और संभवतः वह भाषण उस देश में, मेरे द्वारा दिए गए भाषणों में सबसे लंबा भाषण