93. 24.9.1944 मैं भारत के देश भक्तों से बहुत आगे था। - Page 339

318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है कि अनुसूचित जातियां पृथक और महत्वपूर्णं संघटक नहीं हैं? महामहिम सम्राट की सरकार के गोलमेज सम्मेलन में उन्हें पृथक प्रतिनिधित्व के क्या कारण थे? वे हिंदुओं के उपशीर्ष अथवा एक शाखा, या एक उप समुदाय नहीं रहे हैं। महामहिम सम्राट की सरकार ने उन्हें पृथक प्रतिनिधित्व क्यों दिया? उन्हें पृथक प्रतिनिधित्व इसलिए दिया, क्योंकि वे (महामहिम सम्राट की सरकार) इस बात को मानते थे कि वे पृथक संघटक हैं। इसके बाद जे.पी.सी. रिपोर्ट आई। यह सब पुना इतिहास है। तदुपरांत काफी कुछ हुआ।

मैं अपने हिंदू बंधुओं से यह कहना चाहूंगा कि बेहतर यही होगा कि वे इस

ख्याल को छोड़ दें और स्वयं यह समझ लें कि यह भला है या बुरा, पर अनुसूचित जातियां भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक पृथक तत्व हैं। मैं सुस्पष्ट शब्दों में और निश्चित ढंग से उन्हें बताना चाहता हूं, कि वे इस बाबत कोई गलती न करें।

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जिन्ना - गांधी वार्ता

मुझे मुख्य समस्या के बारे में और कुछ नहीं कहना है। लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं श्री जिन्ना और श्री गांधी के बीच जारी वार्ता के बारे में कुछ क्यों नहीं बोलता। मैं वास्तव में नहीं जानता कि कोई इस वार्ता के बारे में कुछ कह सकता है। वह वार्ता इतनी लंबी चली कि कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि इन दो वृद्ध और प्रिय सज्जनों के बीच क्या चल रहा है, अथवा क्या वार्ता में जीवन्तता है। लेकिन मैं एक बात कहना चाहूंगा। मैं इस बातचीत पर ध्यान नहीं देता और मैं आपको कुछ कारण बताऊँगा। साम्प्रदायिक समस्या अधिकांशतः हिंदू-मुस्लिम समस्या नहीं है। साम्प्रदायिक समस्या एक बड़ी समस्या है। यह ऐसी समस्या है जहां केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि ईसाई, अनुसूचित जातियां और संभवतः अन्य अल्पसंख्यक भी इसमें शामिल हैं। परिणामस्वरूप, इस प्रकार के मामलों में, सबसे समझदार, सुरक्षित और सबसे सच्चा रास्ता यह होगा कि विभिन्न अल्पसंख्यकों के सब प्रतिनिधि एकत्र होकर बैठें, अपना-अपना पक्ष-कथन पेश करें, ताकि प्रत्येक पक्ष यह जान सके कि दूसरा पक्ष क्या कह रहा है और इस प्रकार सभी दूसरों के अधिकारों का उचित आदर करते हुए आपस में परामर्श करें और एक फैसले पर पहुंचे, जो सभी को मान्य हो। इन पंथगत समझौतों और व्यवस्थाओं से दुर्गंध आती है, बास आती है। यह व्यवस्था मुझे उन दो लोगों के बीच एक सौदे जैसी लगती है, जिन्होंने तीसरे आदमी को लूटने का और अपनी स्थिति को बेहतर बनाने का निश्चय किया है। मुझे मालूम नहीं है श्री जिन्ना श्री गांधी से क्या मांग रहे हैं। मैं नहीं जानता गांधी जी श्री जिन्ना को क्या देने को तैयार हैं। लेकिन मैं इस बात से