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विद्यार्थी यह देखें कि उपाधि से सकारात्मक ज्ञान भी मिले
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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने मंगलवार 2 जनवरी, 1945 * को दोपहर बाद स्टूडेंट्स हाल, कलकत्ता, में आयोजित अनुसूचित जातियों के छात्रों की एक सभा को संबोधित करते हुए मत व्यक्त किया कि वर्तमान पीढ़ी के छात्रों की शैक्षिक उपलब्धियों में काफी गिरावट आई है। सेंटपॉल कालेज के प्रो. जे.सी. मंडल ने समारोह की अध्यक्षता की।
अपने भाषण में डॉ. अम्बेडकर ने आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन को अपना निशाना बनाया और छात्रों से कहा कि वे उससे अलग हो जाएं और अनुसूचित जातियों का एक अखिल भारतीय संगठन बनाएँ।
उन्होंने कहा अखिल भारतीय छात्र फेडरेशन एक सुविख्यात संगठन है। उसकी गतिविधियों के बारे में आप लोगों ने प्रायः पढ़ा होगा। कुछ कारणों से मुस्लिम छात्रों का भी एक पृथक संगठन बना है। कारण उन्हें मालूम नहीं हैं, लेकिन मुस्लिम छात्रों ने अपना निजी संगठन शुरू करना जरूरी समझा है।
उनकी टिप्पणी थी कि उनमें से बहुत से छात्रों को संभवतः मालूम नहीं है कि राजनीति उनका सामान्य क्षेत्र नहीं है। उसे इसमें घसीटा गया है। जिस क्षेत्र में उन्हें आनंद आता है, जिस क्षे़त्र में वह अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद लौटना चाहते हैं, वह है शिक्षा का क्षेत्र। वह अर्थशास्त्र और कानून के प्रोफेसर रहे हैं। इसलिए यदि उन्होंने छात्र जगत के अपने अंतरंग अनुभव के आधार पर आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के बारे में कोई तीखी टिप्पणी कर दी हो तो वे क्षमा चाहते हैं।
डॉ. अम्बेडकर को यह कहने में कोई संकोच नहीं था, कि भारत में शिक्षा के स्तर में फिलहाल बहुत गिरावट आई है। इन विश्वविद्यालयों के प्रथम बैच की तुलना उन छात्रों से करते हुए जिनसे वह अपने प्रोफेसर कैरियर में मिले थे, उन्हें यह कहने में कोई संकोच नहीं था कि छात्र जगत की शैक्षिक उपलब्धियों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इस विषय में, न्यायमूर्ति रानाडे, बाल गंगाधर तिलक, गोखले, सर सुरेन्द्र नाथ और सर शिवस्वामी अय्यर के नामों का जिक्र करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा, ‘‘यदि मैं यह कहूं कि इस पीढ़ी मे तुम में से कोई भी उन लोगों के घुटनों तक नहीं पहुंच
* तिथि का स्रोत, जनता, 6 जनवरी, 1945