98. 3.1.1945 देश के लाखों गरीबों के लिए संपन्नता की व्यवस्था की नींव रखिए। - Page 350

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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 3 जनवरी, 1945 को बंगाल सचिवालय, कलकत्ता में आयोजित सम्मेलन में व्याख्यान दिया।

उन्होंने कहा -

‘‘भारत सरकार एक ऐसी नीति बनाना चाहती है जिसके अन्तर्गत देश के जल संसाधनों का प्रयोग, प्रत्येक प्राणी के सर्वोत्तम लाभ के लिए हो और उनका प्रयोग उन प्रयोजनों के लिए हो, जो दूसरे देशों में होता है। भारत सरकार के ध्यान में संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रभावी ‘टेनेसी घाटी योजना’ है। वह उस योजना का अध्ययन कर रही है और वह यह महसूस करती है कि यदि प्रांत अपना सहयोग प्रदान करें और प्रांतीय अड़चनों को हटाने के लिए सहमत हों जिनके कारण उनकी तरक्की और समृद्धि अवरुद्ध होती रही है, तो भारत में उसके अनुरूप कुछ किया जा सकता है।

‘‘देश के जल मार्गों का सर्वोत्तम उपयोग करने के प्रारंभिक उपाय के तौर पर भारत सरकार ने ‘केंद्रीय तकनीकी पावर बोर्ड’ नामक एक ‘केंद्रीय संगठन बनाया है तथा केंद्रीय जल मार्ग सिंचाई और नौवहन आयोग’ बनाने की सोच रही है।

इन दो संगठनों की स्थापना प्रांतों को यह सलाह देने के लिए की गई थी कि वे अपने जल संसाधनों का सर्वोत्तम प्रयोग कैसे करें और सिंचाई से भिन्न प्रयोजन को पूरा करने के लिए कोई परियोजना कैसे बनाई जाए। उस दिशा में दामोदर घाटी प्रथम परियोजना है। यह बहुउद्देशीय परियोजना होगी। इसका उद्देश्य दामोदर में बाढ़ की रोकथाम करना ही नहीं, अपितु इसका उद्देश्य सिंचाई, नौवहन और विद्युतजनन (बिजली बनाना) भी होगा। दामोदर घाटी परियोजना पूरी होने के बाद जो प्राधिकरण इसका प्रभारी होगा वह कमोवेश टेनेसी घाटी योजना के अनुरूप होगा। यह एक सहकारी उपक्रम होगा जिसमें केंद्र तथा बंगाल और बिहार प्रांत भागीदार होंगे। आशा है कि सम्मेलन समस्त वर्गगत दृष्टिकोणों को दरकिनार करके सर्वोत्तम समाधान पर सहमत होने का संकल्प लेकर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होगा तथा जलमार्गों के बारे में एक नई नीति के शुभारंभ का मार्ग खोलेगा और देश के लाखों गरीबों के लिए संपन्नता की सत्ता की नींव रखेगा।

भारत सरकार पूरी परियोजना को एक आकार, स्वरूप देने और उसे जीवंत करने के लिए आतुर है और उसे इस बात की भी चिंता है कि यह सब करने में समय न गंवाया जाए।   