330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाचार-पत्र
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सुशासन का मूल आधार है
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सदस्य, वायसराय कार्यकारी परिषद ने बुधवार, 3 जनवरी, 1945 को अपराह्न, 1-2 सीताराम धोष स्ट्रीट कलकत्ता में, जो अखिल भारतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन का कार्यालय है, उक्त फेडरेशन के साप्ताहिक मुख पत्र ‘पीपुल्स हेराल्ड’ का लोकार्पण किया। फेडरेशन की ओर से माननीय श्री जे.एन. मंडल और श्री आर.एल. विश्वास ने डॉ. अम्बेडकर का स्वागत किया।
माननीय श्री जे.एन. मंडल, अध्यक्ष बंगाल प्रांतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन ने डॉ. अम्बेडकर का स्वागत करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन अनुसूचित जातियों के लिए ही समर्पित नहीं है बल्कि भारत के अन्य शोषित जनसाधारण के लिए भी समर्पित है। उन्हें विश्वास है कि अनुसूचित जातियों और शोषित जनसाधारण का उद्धार डॉ. अम्बेडकर के क्रियाकलाप, मार्गदर्शन और नेतृत्व में ही हो पाएगा।
इससे पहले श्री रसिक लाल विश्वास ने अपने भाषण में कहा था कि इस समय ‘पीपुल्स हेराल्ड’ साप्ताहिक के प्रकाशन का कारण स्पष्ट है। इस युद्ध के फलस्वरूप शीघ्र ही उदित होने वाले नये भारत में हिंदू समाज मुख्य संघटक होगा और इस हिंदू संघटक में अनुसूचित जातियाँ भी कोई नगण्य नहीं होंगी। उन्होंने आगे कहा कि इन जातियों की कुछ विशिष्टताएँ, रूढि़याँ, अधिकार और प्रथाएं हैं, जिनके कारण वे हिंदुओं के अन्य वर्गों से बाहर हैं। अतः अनुसूचित जातियाँ यह मांग रखने की हकदार हैं कि इन विशिष्टताओं का सम्मान किया जाए तथा उन्हें, शिक्षा, नियुक्तियों और उन सब सुविधाओं में जो कोई भी राज्य अपने नागरिकों को प्रदान करे, उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए यह अखबार अनुसूचित जातियों के अखिल भारतीय मुखपत्र के रूप में निकाला गया है और यह अखबार उनकी भावनाओं और उनकी विधिसम्मत आकांक्षाओं, उनकी शिकायतों और उनकी मांगों को एवं भारत की वर्तमान समस्याओं पर तथा भावी भारतीय राज्य की रचना पर उनके विचारों को भी प्रकाश में लाएगा।’’
अपने भाषण के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भविष्य