99. 3.1.1945 आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाचार-पत्र सुशासन का मूल आधार है। - Page 352

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का जिक्र किया और कहा कि महात्मा गाँधी के निधन के पश्चात् उसके टुकड़े हो जाएंगे, क्योंकि वे यह नहीं सोच पाते कि कुछ सौ जमींदार या पूंजीपति और कुछ गुमराह श्रमिक नेता मिलकर एक पार्टी चला सकते हैं। जहाँ तक अंग्रेजों के साथ लड़ाई का संबंध है, वे सभी एक हो सकते हैं, लेकिन जब अंग्रेज चले जाएंगे, शून्य पैदा हो जाएगा। जब वे गद्दी पर बैठ जाएंगे और अपनी सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति को पुनः परखेंगे तो क्या जमींदार और किसान तथा पूंजीपति एवं श्रमिक कांग्रेस मे एक दूसरे के साथ रहने के लिए राजी होंगे? इसलिए स्वराज मिलते ही कांग्रेस टुकड़ों में बिखर जाएगी।

उन्होंने दृढ़ता से कहा, लेकिन अनुसूचित जातियाँ हमेशा बनी रहेंगी, यह एक शाश्वत पार्टी है, क्योंकि वे कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर जीते हैं। यह कहना कोरी बकवास है कि वे दाल-रोटी के लिए लड़ रहे हैं, वे स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के सिद्धांतों के लिए लड़ रहे हैं, जिनका इस देश में पालन होना है। उनके सिद्धांत जिस समिति लक्ष्य में सिमटे हैं, वह है उनकी दृष्टि और वह है, अनुसूचित जातियों का लक्ष्य। उनका लक्ष्य ऐसा सिद्धांत है, जिससे भारत का ही नहीं, विश्व का भी पुनर्निर्माण होगा।

उन्होंने कहा ‘‘व्यक्तिगत तौर पर मैं नहीं समझता कि भारत में कोई काम ऐसा है जो अनुसूचित जातियों के उत्थान से अधिक श्रेष्ठ हो। कांग्रेस में मेरे अनेक मित्र हैं, जो मेरी तरह मेरी राजनीति को भी नापसंद करते हैं। वे मुझसे कहते हैं कि यदि मैं कांग्रेस के अंदर से ही देश के व्यापक हित में काम करूँ, तो मैं एक दिन कांग्रेस का अध्यक्ष बन सकता हूँ। उनकी अपीलों ने मुझे कभी नहीं ललचाया। मैंने हमेशा यह महसूस किया है कि चूंकि मेरा जन्म इन वर्गों में हुआ है इसलिए मेरा यह कर्तव्य है कि मैं पहले उनके लिए कुछ करूँ। मैंने यह भी महसूस किया है और मेरे विचार में काफी आश्वस्त होकर, कि यदि मैं या दूसरे लोग, जिनमें अनुसूचित जातियों के लक्ष्य को पूरा करने की सामर्थ्य है, दूसरी सेवा के लिए और दूसरे लक्ष्य के लिए उस लक्ष्य को छोड़ देंगे तो इस लक्ष्य को हाथ में लेने के लिए कोई अन्य आगे नहीं आएंगे और वह ध्येय उसी जीर्ण अवस्था में पड़ा रहेगा, जिसमें यह पिछले दो हजार वर्षों से पड़ा है। लेकिन यह केवल एक सीमित दृष्टि है। मैं इस लक्ष्य से इसलिए जुड़ा हूँ क्यांकि मैं इसे एक श्रेष्ठ लक्ष्य मानता हूँ। हिंदुओं का लक्ष्य क्या है? कांग्रेस का लक्ष्य क्या है? राष्ट्रीय स्वतंत्रता का मसला क्या है? जहाँ तक हिंदुओं के उद्देश्य का संबंध है यह परजीवी वर्ग का उद्देश्य है। यह वर्ग इस देश के दबे-कुचले लाखों लोगों के खून, पसीने पर जीता है।’’ डॉ. अम्बेडकर ने पूछा- ‘‘क्या कोई आदमी, जिसने राजनीतिक और नैतिक विचारधारा को समझा है और यह मानने लगा है कि विश्व की मुक्ति तब तक नहीं होगी जब तक कि हर