332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समाज में, विश्व का आर्थिक और सामाजिक संगठन स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व पर आधारित न होगा, अनुसूचित जातियों के लक्ष्य को छोड़ने के लिए, बल्कि हिंदुओं के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, कभी सहमत हो सकता है?’’
डॉ. अम्बेडकर ने आगे बोलते हुए कहा, ‘‘इसके पश्चात् देश की आजादी के लक्ष्य पर आइए। दुर्बल को सताने का, ताकतवर से छुटकारा और संपूर्ण इंसान बनने का मौका पाने की दुर्बल की आजादी में बहुत बड़ा अंतर है। मैं अपने उन हिंदू देशभक्तों से, जो आजादी, आदि मुद्दों की बकवास करते हैं, पूछना चाहूँगा कि वे इस आजादी का क्या फायदा उठाने वाले हैं? यदि सामाजिक आजादी यथावत रहेगी, यदि वैसी मानसिकता बनी रहेगी, यदि अंग्रेजों से मिलने वाली आजादी का उपयोग वे दलित और सताये हुए वर्गों को दबाने के लिए करने वाले हैं तो उसके लिए कोई क्यों लड़ाई लड़े, यह मेरी समझ में नहीं आता। दूसरी ओर, यदि आप हमारे लक्ष्य को देखें तो हम जिस सिद्धांत के लिए लड़ रहे हैं आप देखेंगे, यह उस सीमित वर्ग पर आकर टिका है जो हमारी दृष्टि में है।
‘‘आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाचारपत्र सुशासन का मूल आधार है। यह लोगों को शिक्षित करने का एक साधन है। इसलिए भारत में हम अनुसूचित जातियों के लोग सबसे अधिक अभागे हैं, जिसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती और हम भी चिंतित हैं कि वे उससे मुक्त हो जाएं। लेकिन हम तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक कि 8 करोड़ अस्पृश्य लोग राजनीतिक तौर पर शिक्षित न होंगे’’
उन्होंने आगे कहा था, ‘‘यदि यह अखबार विभिन्न विधानमंडलों में हमारे विधायकों के आचरण का समाचार छापने के लिए इसमें कुछ जगह दे सके और लोगों को बता सके, कि उन्होंने ऐसा क्यों किया है और क्यों नहीं किया है तो मेरे मन में कोई संकोच नहीं है कि हमारे विधायकों के आचरण में बड़ा सुधार आएगा और वर्तमान अव्यवस्था बंद हो जाएगी, जो हमारे समाज को बदनामी दिलाने के लिए काफी है। इसलिए मैं इस अखबार से आशा करता हूँ कि यह उन लोगों के शुद्धीकरण करने का एक महान दस्तावेज बने, जो अपने राजनीतिक जीवन में भटक गए हैं।’’
इसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने एक मराठी समाचार पत्र का जिक्र किया, जिसने 1937 में उनके चुनाव अभियान को बढ़ाया था। उन्होंने उस अखबार को सलाह दी कि वह अपने वोटरों को शिक्षित ही न करे बल्कि यह भी देखे कि जो लोग मतदाताओं द्वारा चुने जाएं वे वोटरों के साथ खड़े हों और अपने कर्तव्यों का