99. 3.1.1945 आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाचार-पत्र सुशासन का मूल आधार है। - Page 354

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ठीक से पालन करें तथा बुरा बर्ताव न करें।

अनुसूचित जातियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की उस विशाल सभा में समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि इस समारोह ने उन्हें अपनी आत्मा को पूरी तरह भार मुक्त करने का एक मौका दिया है, क्योंकि यह एक ऐसा अवसर है जिसमें भाग लेने की उनकी सर्वोपरि इच्छा थी। ’पीपुल्स हेराल्ड’ के लिए भारत के अनुसूचित जाति के लोगों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की कामना करते हुए तथा अपने लोगों की सेवा में भूमिका अदा करने के उद्देश्य से आबद्ध इस पेपर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राजनीतिक मुखपत्र की महत्ता कभी भी कम नहीं आंकी जा सकती। इस अवसर पर उन्होंने यह भी बताया कि कदाचित यह ज्यादा लोगों को ज्ञात नहीं है कि उन्होंने स्वयं बम्बई में एक साप्ताहिक मुखपत्र का संपादन अनवरत 16 वर्षों से भी अधिक समय तक किया था। उस पेपर का कितना विलक्षण प्रभाव पड़ा वह स्वयं बम्बई से विधानसभा के आगामी चुनावों में दिखाई दिया था, जहां वह एक सामान्य निर्वाचन क्षेत्र में सभी समुदायों के मतों से चुने गए थे और उन्होंने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार को भारी बहुमत से हराया था। उस पेपर ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण राजनीतिक असर डाला था। इसलिए उन्होंने पीपुल्स हेराल्ड की शीघ्र सफलता की कामना की और आशा प्रकट की कि अनुसूचित जाति का हर सदस्य इस पेपर को अपना निजी पेपर मानेगा।

अनुसूचित जातियों के उद्देश्य को पूरा करने की जिम्मेदारी को अपने ऊपर लेने के लिए अखबार के सम्पादक श्री पी.सी. डे को बधाई देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा, कि उन्होंने देखा है कि देश में अनेक लोग अनुसूचित जातियों के उत्थान के कार्य को सफाई का और गंदा काम मानते हैं।

हिंदू महासभा की आलोचना करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि उन्हें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उनका लक्ष्य परजीवी लोगों का लक्ष्य है जो श्रमिकों की कमाई और इस देश के लाखों दबे-कुचले लोगां के श्रम पर जिन्दा रहते हैं। दुनिया की मुक्ति तब तक नहीं हो सकती, जब तक कि दुनिया के तथा अन्य समाजों के आर्थिक और सामाजिक संगठन स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित न हों। ख्1,

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1 द पीपुल्स हेराल्ड, 10 जनवरी, 1945.