334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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अनुसूचित जातियों को संगठित होना चाहिए
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार ने बम्बई में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जातियों के सदस्यों को संगठित होना चाहिए और देश में अन्य प्रमुख समुदायों के साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समता प्राप्त करने के लिए अखिल भारतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन के ध्वज तले एकजुट हो जाना चाहिए। *
डॉ. अम्बेडकर ने वायसराय की कार्य परिषद में शामिल होने के बाद समाज की भलाई के लिए किए गए कार्यों की व्याख्या की। वह प्रसन्न थे कि सरकार ने अनुसूचित जातियों के सदस्यों के लिए कुछ प्रतिशत पद आरक्षित करने की सहमति दे दी है। वह समाज के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केंद्रीय विधानमंडल में दो और सीटें लेने में सफल रहे। सरकार, समाज के छात्रों को विदेश में पढ़ाई करने में समर्थ बनाने के लिए 3 लाख रुपए का वार्षिक अनुदान देने के लिए भी राजी हो गई है। अपनी जाति को वर्तमान स्थिति से ऊपर उठाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है, लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि जाति कितनी एकजुट होकर अपनी मांगे रखती है।
श्रम सदस्य ने श्रोताओं से कहा कि कार्यकारी परिषद की सदस्यता स्वीकार करने में उनका मुख्य उद्देश्य समाज की अधिक से अधिक भलाई करना है। वस्तुतः वायसराय से अपनी पहली मुलाकात में ही उन्होंने एक ज्ञापन पेश कर दिया था जिसमें दलित वर्ग की कुछ व्यथाएं और मांगें रखी गई थीं। उन्हें खुशी थी कि ज्यादातर मांगे मान ली गईं और वास्तव में, कुछ मांगों के संबंध में, वह कह सकते थे कि अनुसूचित जातियों ने मुस्लिम समुदाय के साथ बराबरी का दर्जा हासिल कर लिया है। ख्1,
* 1 द पीपुल्स हेराल्ड, 7 अप्रैल, 1945. संबोधन की तिथि वर्णित नहीं है - संपादक