101. 6.5.1945 आदिवासी जनजातियों के लिए एक कानूनी आयोग होना चाहिए। - Page 357

336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बुद्ध को इस देश के विद्यमान सामाजिक मतभेद का प्रथम निवारक मानते थे।

विभिन्न भाषाओं में अनेक स्वागत गीत गाए गए। फेडरेशन के महासचिव, श्री पी.एन. राजभोज ने पिछले वर्ष की प्रगति रिपोर्ट पेश की। स्वागत समिति के महासचिव, श्री एस.बी. जाधव ने सम्मेलन के लिए भेजे गए संदेश पढ़े। इन संदेश भेजने वालों में श्री सी.डी. देशमुख, आई.सी.एस., गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक; डॉ. अल्बेन डिसूजा, महापौर, बुंबई; श्री मोदक, नगर इंजीनियर, सर रूस्तम मसानी, नेशनल वार फ्रंट; श्री मदान, आई.सी.एस.; श्री टोंटन, आई.सी.एस., मुंबई के गवर्नर के सलाहकार; सर कावसजी जहांगीर, श्री बाला साहेब खेर, पूर्व मुख्य सचिव, मुंबई क्षेत्र; श्री शेखिया, पूर्व मंत्री असम; श्री के.ए.पी. विश्वनाथन, मद्रास जस्टिस पार्टी, कानपुर के श्री प्राणदत्त; मुंबई बार के श्री वैलंकर; बड़ौदा से माने और श्री मणिलाल परमार आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

इस अवसर पर अनेक सम्मेलन आयोजित किए गए थे, जैसे श्रीमती मीनमबाई शिवराज के सभापतित्व में ‘महिला सम्मेलन’, ‘‘मुंबई म्युनिसिपल वकर्स फेडरेशन’’, श्री प्यारेलाल तालिब की अध्यक्षता में ‘छात्र फेडरेशन’, ‘समता सैनिक दल सम्मेलन’, जो जे.एस. सुब्बया की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इन सम्मेलनों में विभिन्न प्रतिनिधियों ने सवर्णों द्वारा उन पर किए गए अत्याचारों की प्रकृति बताई।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का ऐतिहासिक भाषण रविवार अर्थात् 6 मई 1945 को हुआ जिसके लिए लगभग डेढ़ लाख लोग उपस्थित थे। ख्1,

(डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इस सम्मेलन के लिए जो भाषण तैयार किया था वह ‘कम्युनल डैड लॉक एंड वे टू सॉल्व इट’ शीर्षक से छापा गया था। हम उस भाषण का एक अंश यहाँ दे रहे हैं -संपादक)

अपने भाषण में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने आदिवासी जनजातियों के उत्थान के लिए जो स्कीम बताई थी, वह इस प्रकार है :-

‘‘यह स्पष्ट है कि मेरे प्रस्तावों में आदिवासी जनजातियों को नहीं लिया गया है, हालांकि वे सिखों, एंग्लों इंडियन, भारतीय ईसाईयों और पारसियों से संख्या में अधिक है।ं मैंने उन्हें अपनी स्कीम से क्यों अलग रखा? मैं इसका कारण बताना चाहूंगा। आदिवासी जनजातियों ने अपने राजनीतिक अवसरों का सर्वोत्तम प्रयोग करने के लिए कोई राजनीतिक दृष्टि अभी तक विकसित नहीं की है और वे आसानी से

1 भूषण का पाठ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर राइटिंगस एंड स्पीचेज़ खंड 1 में, पृष्ठ 355-379 पर प्रकाशित है