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बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक के हाथ का खिलौना बन सकते हैं और ऐसा करके वे अपना कोई भला किए बिना संतुलन बिगाड़ सकते हैं। उनके विकास के वर्तमान स्तर पर मुझे ऐसा लगता है कि इन पिछड़े समुदायों के लिए उचित यही होगा कि एक कानूनी आयोग की स्थापना की जाए, जो बहिष्कृत क्षेत्रों का प्रशासन उसी आधार पर करे, जैसा दक्षिण अफ्रीकी संविधान के मामले में किया गया था। प्रत्येक प्रांत को जिसमें यह बहिष्कृत क्षेत्र स्थित है, इन क्षेत्रों के प्रशासन के लिए एक निश्चित राशि का वार्षिक अंशदान देने के लिए बाध्य किया जाए।’’ ख्2,
बंबई के एक प्रख्यात कांग्रेसी नेता और हरिजन सेवक संघ के महासचिव, ए.वी. ठक्कर ने जो गांधी जी से घनिष्ठ रूप से संबद्ध थे, साम्प्रदायिक समझौते के प्रस्ताव की आलोचना की, जिसकी परिकल्पना डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के भाषण में की गई थी। आलोचना का उनका पत्र तारीख 17 मई, 1945 के टाइम्स ऑफ इंडिया के अंक में प्रकाशित किया गया था।
2 डा. बाबसाहेब अम्बेडकर, लेख तथा भाषण, खंड 1, पृष्ठ 375