106. 17.2.1946 अनुसूचित जातियों की मांगे एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के पास भेजी जाएं। - Page 369

348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उन्होंने आगे कहा कि अनुसूचित जातियाँ चुनाव के समय संगठनों के मामले में कांग्रेस से प्रतिस्पर्धा करने की आशा नहीं कर सकतीं, क्योंकि उसे पूंजीपतियों का वरदहस्त प्राप्त है। मतदान केंद्रों तक मतदाताओं को ले जाने के लिए कारें उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं। हमें पक्का विश्वास है कि प्रत्येक अनुसूचित जाति का मतदाता मतदान केंद्र पर चलकर जाएगा और अपने मताधिकार का प्रयोग करेगा और इस प्रकार दुनिया को दिखा देगा कि वे फेडरेशन का साथ मजबूती से देख रहे हैं। फेडरेशन की ताकत प्रारंभिक चुनावों में प्रचुर मात्रा में साबित हुई है। उसमें फेडरेशन के समर्थकों ने कांग्रेसी समर्थकों को पीछे छोड़ दिया था। उसके परिणामों को देखते हुए, यदि कांग्रेसय लोकतंत्र के अपने पेशे के प्रति सच्ची थी, तो उसे मुकाबले से अलग हो जाना चाहिए था।

चुनाव अभियान के लिए भेंट की गई धनराशि का हवाला देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि यद्यपि यह राशि बहुत मामूली है फिर भी वह इससे जरा भी चिंतित नहीं हैं, क्योंकि यह अभियान ‘साफ, सच्चा और निष्कपट होगा’। कांग्रेसी नेता विशाल धनराशि एकत्र कर रहे हैं क्यांकि वे वोट खरीदने की कोशिश करेंगे।

इससे पहले श्री बी.के. गायकवाड ने जन-समूह को संबोधित करते हुए कहा था कि श्री गांधी ने अनुसूचित जातियों के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने मद्रास में श्री गांधी के हाल के भाषण की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अनुसूचित जातियां सरकार की ओर देखती हैं, क्योंकि वे राय बहादुर बन सकते हैं या अच्छी नौकरियां पा सकते हैं।

डॉ. अम्बेडकर सतारा और बेलगाम जिले में अपने चुनाव दौरे से रविवार प्रातः वापस आए थे और सोमवार शाम को बम्बई से दिल्ली के लिए जाने वाले थे। ख्1,

बहरहाल, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के भाषण में उस विषय के बारे में कुछ अतिरिक्त प्रसंग थे, जो ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ में छपे थे। वे प्रसंग इस प्रकार थे :-

‘‘हमें हिंदुओं में कोई विश्वास नहीं है। उन्होंने हमारे साथ पिछले दो हजार वर्षों में अत्यंत घटिया और अपमानजनक ढंग से बर्ताव किया है और हम अपने आपको संगठित करने की स्थिति में है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार ने उस शाम नरेपार्क में अनुसूचित जातियों की एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आगे कहा था कि हम उस चीज को प्राप्त करने में कोई कसर नहीं छोडेंगे जो हमें बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी।

उन्होंने घोषणा की थी कि ‘स्वराज’ और राष्ट्रीय सरकार का मतलब है केवल ‘हिंदू राज’’ जिसे वे अब और ज्यादा सहन नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने से पहले अधिकारों के वितरण की मांग की।’’ ख्2,

1 जय भीम, 5 मार्च, 1946     2 फ्री प्रेस, जर्नल, 18 फरवरी, 1946