108. 13.8.1946 अनुसूचित जातियों को जहां का तहां छोड़ दिया गया। (जय भीम) - Page 371

350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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अनुसूचित जाति फेडरेशन के तत्वधान में आयोजित एक अधिवेशन में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इस बात पर गहरा खेद व्यक्त किया कि ब्रिटिश कैबिनेट प्रतिनिधि मंडल ने उनके साथ जिस तरह का बर्ताव किया है, वह भारत की अनुसूचित जातियों के लक्ष्य पर डाला गया एटमबम है। श्री जे.एन. मंडल, मंत्री, बंगाल सरकार ने अधिवेशन की अध्यक्षता की।

डॉ. अम्बेडकर ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि देश की अनुसूचित जातियों को अंतरिम सरकार में केवल एक सीट आबंटित की गई है, जब कि उनकी संख्या छह करोड़ है। दूसरे समुदायों को भी एक-एक सीट आबंटित की गई है, जबकि उनकी संख्या 20 या 40 लाख से अधिक नहीं है।

डॉ. अम्बेडकर ने यह घोषणा करते हुए कि बिहार और बम्बई के अनुसूचित जाति के लोगों ने ही इस देश में शासन स्थापित करने में अंग्रेजों की मदद की थी, आगे कहा कि भारत में केवल हिंदुओं और मुस्लिमों ने ही पिछले 150 वर्षों में ब्रिटिश राज का अच्छा फल भोगा है, जब कि अनुसूचित जातियों को वहीं छोड़ दिया गया जहां वे शुरू में थे। उन्हें कुंओं पर नहीं चढ़ने दिया जाता, मंदिरों, धर्मशालाओं, कार्यालयों और कचहरियों में नहीं जाने दिया जाता। उन्होंने आगे कहा कि कैबिनेट मिशन की कार्रवाई ने उनका रास्ता अलग बना दिया है।

डॉ. अम्बेडकर ने श्रोताओं को चेतावनी दी कि जब तक कि आगामी संघर्ष में उनके पास राजनीतिक शक्ति नहीं होगी, भारत की अनुसूचित जातियां बर्बाद हो जाएंगी। वे अन्य समुदाय उन्हें कुचल डालेंगे, जिनके पास जबर्दस्त ताकत है और उनके साथ ‘पैरिया श्वानों’ जैसा व्यवहार करने के अभ्यस्त हैं।

डॉ. अम्बेडकर ने प्रांतीय विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों के सदस्यों से अपील की कि वे अपना भाग्य बनाने और उस दिशा में कूंच करने के बारे में इस परीक्षा की घड़ी में अपने कर्तव्यों के बारे में सोचें।

अखिल भारतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन के सचिव श्री पी.एन. राजभोज ने भी सभा को संबोधित किया। ख्1,

1 जय भीम, 13 अगस्त, 1946     तारीख और स्थान नहीं लिखा है - संपादक।