109. 14.4.1947 मैं अपने लोगों के साथ इस देश के प्रति भी निष्ठावान हूं। - Page 374

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सामने जो ज्ञापन पेश किया था, उसे समिति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। एक मुद्दा था जिस पर कुछ मतभेद था - वह मुद्दा प्रशासन में भेदभाव के बारे में था और सार्वजनिक सेवा के विषय में था। इस प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए मैंने कुछ उपाय प्रस्तावित किए हैं और मुझे विश्वास है कि मैं सफल रहूंगा। यदि ऐसा हो जाता है तो जहां तक विधानमंडल या कार्य समितियों का संबंध है, हमें संविधान से ही काफी संरक्षण प्राप्त होगा। अल्पसंख्यक उप-समिति की बैठक 17 अप्रैल को होगी और वह कुछ समय तक अपना काम करती रहेगी। मुझे अफसोस है कि अनुसूचित जातियों के दो सदस्यों ने, जो अल्पसंख्यक समिति में हैं, एक ज्ञापन भेजा है, जो अनुसूचित जातियों की व्यापक विचारधारा के प्रतिकूल है। एक ने पृथक निर्वाचक मंडल के बजाय संयुक्त निर्वाचक मंडल का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मतदान की वितरक प्रणाली द्वारा संयुक्त निर्वाचक मंडल का प्रस्ताव रखा है, जो राजनीति दासता से भिन्न कुछ नहीं है। (शर्म-शर्म के नारे) मैंने पूरी ताकत के साथ लड़ने का प्रस्ताव रखा है और मुझे आशा है कि मैं उप-समिति में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का समर्थन प्राप्त करने में कामयाब हो जाऊंगा। इस समय मैं यह बताना चाहता हूं कि क्या होने वाला है? क्या समिति बहुमत द्वारा मुद्दे का फैसला करने वाली है अथवा क्या वह बातचीत करना चाहती है। यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में मेरा मन स्थिर नहीं है। लेकिन यदि वे बहुमत से मुद्दे का विनिश्चय करते हैं तो मैं निश्चय ही संविधान सभा से अपने आपको पूरी तरह अलग करने के लिए कोई निश्चित कदम उठाऊंगा। (जोरदार तालियां) तब हम तय करेंगे कि निश्चित रूप से क्या करना है, जैसाकि आप जानते हैं इस राजनीतिक मामले में हमारा सरोकार दोहरी निष्ठा से है, कम से कम मेरा तो है। मैं इस देश में रहने वाले अपने लोगों के प्रति निष्ठावान हूँ और मैं कृतसंकल्प हूँ कि अब तक जो कठिनाइयां उन्होंने झेली हैं वे राजनीतिक रक्षोपायों से दूर हो जाएं। मैं इस देश के प्रति भी निष्ठावान हूँ। मुझे कोई संदेह नहीं है कि आप भी निष्ठावान हैं। हम सब यह चाहते हैं कि यह देश आजाद हो। जहां तक मेरा संबंध है मैं इस विचार से प्रेरित होकर काम करता हूंः कि आजादी प्राप्त करने में इस देश के मार्ग में कोई बड़ी अड़चनें खड़ी न हों, हालांकि जो प्रस्ताव तैयार किए गए थे उसमें कैबिनेट मिशन द्वारा हमारी उपेक्षा की गई थी। आप जानते हैं कि मैंने अनेक भाषण दिए हैं जो इस विचार से प्रेरित रहे हैं कि यह देश आसानी से आजादी प्राप्त कर ले। साथ ही मैं इस बात के लिए भी कृतसंकल्प हूँ कि इन छह करोड़ अछूतों की राजनीतिक अधिकारों के माध्यम से रक्षा नहीं की जाती है और यदि अनुसूचित जातियों के रक्षोपायों के निर्धारण के विषय में कांग्रेसियों की ओर से उचित प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो यदि मैं वह कदम उठा लूँ अर्थात् मैं संविधान सभा से अपने आपको अलग कर लूँ, तो मुझे विश्वास है कि