110. 25.9.1947 अल्पसंख्यक को हमेशा मनाना चाहिए, उस पर कभी हुक्म नहीं चलाना चाहिए। - Page 377

356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लिया। अनुसूचित जातियों की यह हानि राष्ट्रीय हरिजनों के शर्मनाक दृष्टिकोण के कारण हुई। अल्पसंख्यक उप-समिति में मैंने यह समाधान सुझाकर पृथक निर्वाचक मंडल की माँग की थी कि सफल उम्मीदवार को अंततः अपने समुदाय के 35 प्रतिशत मत प्राप्त करने चाहिए। लेकिन तभी मतदान के समय, मुस्लिम समूह के सभागार छोड़कर चले जाने से मेरे प्रस्ताव पर पक्ष और पिवक्ष में बराबर मत अर्थात 7 और 7 मत प्राप्त हुए। मैंने सलाहकार समिति में भी कोशिश की और अजीब बात यह है कि श्री मनुस्वामी पिल्लै, अध्यक्ष, मद्रास विधानसभा ने मेरे संशोधन का समर्थन किया। श्री वल्लभ भाई पटेल ने भी उसके खिलाफ मतदान नहीं किया, किंतु साधारण संविधान सभा में मेरे समर्थक श्री पिल्लै उन हस्ताक्षरकर्ताओं में से थे जिन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। यह सब देखकर मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। व्यापक अनुसूचित जातियों के समान हित और स्थायी मुसीबत के संबंध में राष्ट्रीय हरिजनों ने यह दूसरी धूर्ततापूर्ण भूमिका अदा की। यही कारण है कि मेरे सामने फिलहाल कोई स्पष्ट कार्यक्षेत्र नहीं है।

‘‘अब मैं आपको एक बात बता दूँ कि पृथक निर्वाचक मंडल मात्र अनुसूचित जाति फेडरेशन का एकमात्र साध्य और साधन नहीं है। हमारे साधनों के साथ पृथक निर्वाचक मंडल ठीक हैं किंतु वे अपने आप में ठीक नहीं हैं। आपको पृथक निर्वाचक मंडल तो मिल जाएगा लेकिन कोई राजनीतिक रक्षोपाय नहीं होंगे। मुझे नहीं मालूम की उनका क्या होग? मैं विधानसभा और सेवाओं में कुछ राजनीतिक रक्षोपाय आपको दिलाने में कामयाब हो सकता हूँ। मेरे प्रश्नों के फलस्वरूप शेष अल्पसंख्यक जैसे सिख, भारतीय ईसाई और मुस्लिमों को कुछ रक्षोपाय प्राप्त हैं। मैं इस माँग पर लगातार डटा रहा। इसी कारण संविधान सभा इस प्रक्रम पर मुझे नाराज करने का साहस नहीं जुटा पाई। मुझे खुशी है कि मैं सही अर्थों में अल्पसंख्यकों की सेवा कर सका।

‘‘संभव है कि आप निराश रहे हों और मैं भी इससे बहुत खुश नहीं हूँ, तो भी हमें भविष्य मे ंअपनी भूमिका अदा करनी होगी। मैं आपको ब्रिटिश लेबर पार्टी के इतिहास के बारे में बताना चाहता हूँ। पिछले 24 वर्षों में यह पार्टी इतनी आगे बढ़ी है कि आज उसका शासन है। जब यह पार्टी पहली बार संगठित हुई थी तब वस्तुतः संसद में इसका कोई प्रतिनिधि नहीं था। इससे क्या स्पष्ट होता है? इससे पता चलता है कि चुनाव में सफलता पार्टी की विजय नहीं होती बल्कि सिद्धांत और कार्यक्रम की सफलता पार्टी की विजय होती है। मुझे कोई संदेह नहीं है कि अनुसूचित जाति फेडरेशन अपने सिद्धांतों के लिए अपनी भूमिका अदा करेगी। इसी कारण मैं बिल्कुल भी निराश नहीं हूँ। इसलिए हमें निम्नलिखित तीन बातों को ध्यान में रखना चाहिएः-

( i ) अनुसूचित जाति फेडरेशन को हर हाल में अपना राजनीतिक असित्त्त्व