362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘एक दूसरा राजनीतिक दर्शन था - वाल्टर बैगहॉट का दर्शन। वह संसदीय शासन को विचार-विमर्श का शासन कहते थे, जो मेरे विचार में संसदीय शासन का बिल्कुल सही वर्णन है। संसदीय शासन में पर्दे के पीछे कुछ नहीं किया जाता और न ही किन्हीं विशेष व्यक्तियों की इच्छाओं के फलस्वरूप कुछ किया जाता है। प्रत्येक विषय या तो विधेयक के रूप में या संकल्प के रूप में या किसी अन्य प्रस्ताव के रूप में सदन के समक्ष लाया जाता है।
‘‘जब इसे सदन के सामने रखा जाता है, तब उस पर बहस की जा सकती है। बड़े दुख की बात है कि हमने तथाकथित ‘एन्क्लोजर’ नामक प्रस्ताव को स्वीकार करने की महान संसदीय पद्वति का अनुसरण नहीं किया है। (यहाँ स्पीकर ने संक्षेप में यह बताया कि किस प्रकार पारनेल ने ग्लैडस्टन और लार्ड नॉर्थब्रूक को 48 घंटे, 36 घंटे और 24 घंटे बनाकर तंग किया था और इसके फलस्वरूप एन्क्लोज़र की पद्वति का किस प्रकार विरोध किया गया।)
‘‘बहरहाल, इस तथ्य के होते हुए भी कि अब सभी विधानमंडलों में ऐसा नियम है कि बहस बंद की जाए और प्रश्न पूछा जाए। चर्चा के लिए हमेशा काफी समय रहता है। ध्यान रहे कि संसद में जो चर्चा होती है, वह उस प्रश्न के फैसले के लिए ही सुसंगत नहीं होती जो उसके लिए निःसंदेह है, अपितु वह और भी व्यापक सुसंगत तथा व्यापक महत्वपूर्ण होती है। यदि बहस का स्तर ऊँचा है और अखबरों में उसकी सही रिपोर्ट छपी है तो प्रकटतः हाऊस ऑफ कामन्स में वाद-विवाद से भिन्न आम लोगों के लिए राजनीतिक शक्ति का कोई बड़ा माध्यम नहीं हो सकता।
‘‘कहा गया है कि संसदीय शासन स्वशासन है। निःसंदेह तार्किक दृष्टि से ऐसा है, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण बात, जिसे आपमें से अधिकांश याद रखेंगे, वह यह है कि देश सुशासन चाहता है और प्रश्न यह है कि आपको सुशासन कैसे मिल सकता है? यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। मैं कोई सिद्धांत बघारना नहीं चाहता हूँ, मैं आपके विचार के लिए एक या दो मताभिव्यक्तियाँ रखना चाहता हूँ क्योंकि उन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। मेरे मतानुसार सुशासन क्या है? उसका कोई सिद्धांत नहीं हो सकता। विभिन्न लोग सुशासन की भिन्न-भिन्न धारणाएं प्रस्तुत कर सकते हैं। पूंजीवदी समझते हैं कि पूंजीवादी शासन प्रणाली, जहाँ न्यूनतम हस्तक्षेप है, अच्छा शासन होता है, दूसरी ओर, समाजवादियों का विचार है कि समाजवादी शासन प्रणाली श्रेष्ठ शासन है। और भी अनेक प्रकार के लोग हो सकते हैं। तथ्य यह है कि सुशासन क्या है, इसके बारे में विभिन्न प्रकार के मत हैं। हमारे जैसे बहुल समाज में जहाँ इसके सभी भिन्न-भिन्न परिणाम होते हैं, कोई सर्वोपरित उपचार संभव नहीं हो सकता।’’