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14 जनवरी, 1948 को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने धोबी तलाब रात्रि विद्यालय के वाद-विवाद प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित किया। यह समरोह सिद्धार्थ कालेज के परिसर में आयोजित किया गया था।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने छात्रों से प्रभावी ढंग से कहा कि जनसभाओं में बोलने की कला अथक परिश्रम करके विकसित की जा सकती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि महान वक्ता श्री गोपाल कृष्ण गोखले अपना प्रथम भाषण देते समय किस प्रकार घबरा गए थे, फिरोज शाह मेहता ने आइने लगे एक कमरे में अपने भाषण दोहराकर अपनी शक्ति को किस प्रकार विकसित किया था, जहाँ वह देख सकते थे कि उनके हाव-भाव किस प्रकार बदलते हैं और उनके हाथ किस प्रकार चलते हैं। उन्होंने कहा कि मेहता ने इस बात पर बड़ा ध्यान दिया था कि उनकी वेशभूषा और उनका चेहरा साफ-सुथरा और प्रभावकारी हो। उन्होंने आगे कहा कि महान वक्ता चर्चिल ने कोई भी भाषण, तैयारी के किए बिना, नहीं दिया था। ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 401