112. 10.4.1948 मनु अथवा याज्ञवल्क्य के देवी कानूनों के कारण, हिंदू समाज कभी अपना सुधार नहीं कर सका। - Page 386

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कोई प्रस्ताव न रखा जाए, कुछ नई प्रक्रिया है। लेकिन मैं समझता हूँ कि यह एक आम भ्रांति है। विनय-पिटक में, जिसमें भिक्खु संघ के अधिवेशनों के प्रक्रिया नियम लेखबद्ध हैं यह सुविदित नियम था कि ‘नेति’ प्रस्ताव के सिवाय कोई वाद-विवाद नहीं हो सकता।

‘‘आज हम समझते हैं कि गुप्त मतदान एक ऐसी चीज है जिसे अंग्रेजों ने शुरू किया था। यह भी एक भूल है। विनय-पिटक में मतगणना के लिए एक निश्चित प्रावधान है। उसे ‘सालपत्रक ग्राहक’ कहते हैं। सालपत्रक (पेड़ की टहनी) को मतपत्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। गुप्त मतदान की भी व्यवस्था थी, जिसके अंतर्गत भिक्खु स्वयं मतपेटी में अपना सालपत्रक डाल सकता था।

‘‘मैं इन राजनीतिक बातों का इसलिए उल्लेख कर रहा हूँ क्योंकि अनेक इतिहासकारों का कहना है कि जहाँ उन्होंने जीवन की अन्य शाखाओं में प्रगति की, वहाँ भारत के लोग राजनीतिक दृष्टि से बहुत पिछड़े हुए थे। मैं इस विचारधारा का खंडन करता हूँ।

‘‘मैं यह मानता हूँ कि हमने किसी न किसी कारणवश उस राजनीतिक प्रतिभा को खो दिया। हमने सभी संसदीय संस्थाओं को खो दिया और हम निरंकुश राजा की प्रजा बन गए। यहाँ सभ्यता का पतन शुरू हुआ और भारतीय समाज का, अन्य सभी समाजों की तरह, समय-समय पर पतन होता रहा।

‘‘सिवाय उन कठिनाइयों के जो युद्ध के कारण उत्पन्न हुई हैं, ऐसा क्यों है कि आधुनिक काल में ऐसा प्रतीत होता है कि समाज, बहुत सी कठिनाइयों के बिना ही निरंतर न्रगति कर रहा है? प्राचीन समाज में ऐसा क्यों नहीं होता था?

‘‘प्राचीन समाज और आधुनिक समाज में अंतर इस बात में है कि प्राचीन समाज में कानून बनाना जनता का कार्य नहीं था। कानून ईश्वर या कानून निर्माता द्वारा बनाया जाता था। समाज का काम उस कानून का केवल पालन करना होता था, जो या तो दैवी शक्ति द्वारा बनाया जाता था या कानून निर्माता द्वारा। यही मूल कारण था कि प्राचीन समाज में कोई सतत सभ्यता नहीं रही।

‘‘कानून का वास्तविक काम समाज के दोषों को दूर करना है दुभाग्यवश प्राचीन समाज ने कभी भ अपने स्वयं के दोषों को ठीक करने का काम हाथ में लेने का साहस नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि वे नष्ट हो गए। हिंदू समाज के पतन का एक कारण यह भी है कि यह समाज एसे कानून द्वारा शासित होता था जो या तो मनु द्वारा बनाया गया था या याज्ञवल्क्य द्वारा। इस कानून निर्माताओं