366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
द्वारा बनाया गया कानून दैवी कानून है। इसका परिणाम यह हुआ कि हिंदू समाज कभी भी अपने में सुधार नहीं कर पाया।
‘‘यूरोप में कालांतर में धर्म सापेक्ष कानून की अधिकारिता को धर्मनिरपेक्ष कानू द्वारा चुनौती दी गई, जिसका परिणाम यह हुआ कि आज परिश्चम में कानून पूर्णतः धर्मनिरपेक्ष है और गिरजाधर का अधिकार क्षेत्र केवल पादरी तक सीमित है।
‘‘दुर्भाग्यवश, महान विद्वान् प्रोफेसर मैक्समूलर सहित अनेक लेखकों ने, जिन्होंने भारत के अतीत में शोध किया है, इस धारणा को जन्म दिया कि भारतीय कानून बिल्कुल भी नहीं बदला है। यह इसी कथन के अनुरूप है, जो रूढि़वादी पंडित कहते आए हैं। लेकिन मैंने जो अध्ययन किया है उसमें मैं यह कह सकता हूँ कि वह एक पूर्ण भ्रांति है।
‘‘विश्व में ऐसा कोई देश नहीं है जिसमें इतनी क्रांतियाँ हुई हों, जितनी इस देश में। इस देश में यूरोपवासियों द्वारा पोप के प्राधिकार को चुनौती देने से बहुत पहले धर्मसापेक्ष विधि और धर्मनिरपेक्ष विधि में मतभेद रहा है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में धर्मनिरपेक्ष कानून की आधारशिला रखी गई। भारत में दुर्भाग्यवश धर्मनिरपेक्ष कानून पर धर्मनिरपेक्ष कानून पर धर्मसापेक्ष कानून विजयी रहा। ऐसा क्यों हुआ? मेरी राय में यह इस देश में घोर आपदाओं में से एक थी। हिंदू समाज का अप्रगतिशील स्वरूप इस धारणा के कारणा था कि कानून बदला नहीं जा सकता।