370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लोग ऊँची जातियों के खिलाफ एक पृथक मोर्चा बना लें, तो मुझे कोई आपधि नहीं होगी। दुखद बात यह है कि अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्ग अपनी शक्ति के प्रति सजग नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप ऊँची जातियों का प्रशासन में प्रभुत्व है।
‘‘आप लोग एक नेता, एक पार्टी और एक कार्यक्रम के अनुसार अपने आपको संगठित कीजिए। आप सब जातिगत भिन्नताएँ भुलाकर फेडरेशन के तत्वावधान में अपने आपको संगठित कीजिए।’’
| vE | csMd | j |
|---|
| d | k |
|---|
| o | D | r | O; |
|---|
लखनऊ के उक्त भाषण में कुछ अन्य बातों को स्पष्ट करने के लिए और सविस्तार बताने के लिए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा जारी किया गया एक वक्तव्य निम्न प्रकार है :-
‘‘मैंने 25 अप्रैल को लखनऊ में आयोजित अनुसूचित जाति फेडरेशन के सम्मेलन में दिए गए अपने भाषण का अत्यंत विकृत रूप देखा है और मुझे एक स्थानीय दैनिक पत्र में यह पढ़कर बहुत दुख हुआ है कि मैंने अपने साथियों के बारे में कुछ कठोर टिप्पणियाँ की हैं। मैं उस गलतफहमी को दूर करना और जो कुछ मैंने लखनऊ में कहा था उसकी रूपरेखा प्रस्तुत करना आवश्यक समझता हूँ।
‘‘मेरा भाषण तत्काल भाषण था, लेकिन मैं अपने भाषण में दिए गए बिन्दुओं का नीचे उल्लेख करता हूँ। आशय था उन बिंदुओं के माध्यम से उस आलोचना का जवाब देना, जो मेरे अपने कुछ अनुयायियों द्वारा विभिन्न आधारों पर मेरे खिलाफ की गई है :-
(1) मैं केबिनेट मिशन के प्रस्थान के समय से मौन क्यों हूँ?
(2) मैं कांग्रेस सरकार में क्यों शामिल हुआ?
(3) मैं भविष्य में क्या करना चाहता हूँ?
‘‘बिंदु (1) के जवाब में मैंने कहा था : अनुसूचित जाति फेडरेशन ने राजनीतिक रक्षोपाय माँगे थे, जिनमें से सबसे अधिक महत्वपूर्ण पृथक निर्वाचक मंडल थे। यदि प्रारंभिक निर्वाचकों के परिणामों को कसौटी मान लिया जाए तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि संपूर्ण अनुसूचित जातियों की यही माँग थी। ऐसा होते हुए भी हमारी माँग कैबिनेट मिशन द्वारा नामंजूर कर दी गई। यह दो कारणों से हुआ था : ( i ) हम मुसलमानों और सिखों की तुलना में एक कमजोर पार्टी थे और (पप) हम संगठनात्मक रूप में विभाजित थे, जिसमें अनेक पंचमाँग अर्थात् ‘फिफ्थ कालमनिस्ट’ थे।