113. 24/25.4.1948 एक नेता, एक दल, एक कार्यक्रम के अनुसार संगठित हों। - Page 392

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‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि कैबिनेट मिशन के फैसले एक पृथक राजनीतिक शक्ति के रूप में अनुसूचित जातियों को समाप्त करने वाले थे और यह कि राजनीतिक रक्षोपायों के बिना अनुसूचित जातियाँ मुझे गर्त में जाती प्रतीत होती थीं। मेरे सामने पूर्ण अंधकार था। यही कारण है कि मैंने कोई वक्तव्य नहीं दिया है।

‘‘बिंदु (2) के उत्तर में मैंने कहा था :-

‘‘यह सही है कि मैं कांग्रेस का विरोधी और आलोचक रहा हूँ, किंतु मैं विरोध की खातिर विरोध में विश्वास नहीं रखता। जहाँ हम सहयोग द्वारा कुछ पा सकते हैं वहाँ सहयोग की भावना होनी चाहिए। मैंने सोचा कि कांग्रेस के लड़ने का कोई फायदा नहीं है, इसलिए मैंने सहयोग करने का फैसला किया और सहयोग द्वारा हमने संविधान में कुछ रक्षोपाय प्राप्त किए, जो हम अन्यथा नहीं पा सकते थे, और मैंने अपने तर्क को सिद्ध करने के लिए कुछ दृष्टांत पेश किए थे।

एन.पी. जहाँ तक कैबिनेट में शामिल होने का संबंध है, मैंने कहा था कि इसके दो कारण हैं जो मुझे यह पेशकश स्वीकार करनी पड़ी - ( i ) पेशकश बिना शर्त थी ( ii ) कोई व्यक्ति सरकार से बाहर रहने के बजाए सरकार में रहकर बेहतर ढंग से अनुसूचित जातियों के हितों को पूरा कर सकता है।

‘‘मैंने कहा था कि अनुसूचित जातियों को उनके खिलाफ अहिताकरी कानून जाने का डर नहीं है, उन्हें कुप्रशासन का भय है। यह कुप्रशासन अनुसूचित जातियों के लोगों के प्रशासन में न होने के कारण है।

‘‘प्रशासन अनुसूचित जातियों के प्रति सहानुभूति नहीं रखता, क्योंकि उसमें सभी सवर्ण हिंदू अधिकारी हैं जो गाँवों में उन सवर्ण हिंदुओं के पक्ष में हैं जो अनुसूचित जातियों से बेगार लेते हैं और उन पर दिन-रात अत्याचार और उत्पीड़न करते हैं। यह अत्याचार और उत्पीड़न तभी मिटाया जा सकता है, जब अनुसूचित जातियों के ज्यादा लोग सिविल सेवा में स्थान पा सकें। यह कार्य शासन से बाहर रहने के बजाए सरकार में रहकर बेहतर ढंग से किया जा सकता है।

‘‘जहाँ तक तीसरे मुद्दे का संबंध है, मैंने कहा था कि कांग्रेस में शामिल होने का कोई फायदा नहीं है। सुरक्षा दो दलों के होने में है। सरकार की आलोचना करने के लिए विपक्ष अवश्य होना चाहिए वरना सरकार आसानी से तानाशाह हो सकती है। यह ऐसा घर है जो जल रहा है। कांग्रेस में अनेक लोग ऐसे हैं जो विपक्ष में आना चाहते हैं जिसकी आवश्यकता वे बहुत दृढ़ता से महसूस करते हैं।

‘‘दूसरे, कांग्रेस स्वयं ही विभाजित हो रही है। समाजवादी उससे अलग हो चुके हैं। अभी कोई यह नहीं कह सकता कि वे कितनी बड़ी पार्टी बना पाएँगे, काफी