372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बड़ी पार्टी बनाने की संभावनाएँ हैं। यहाँ इसके बाद दो दल होंगे : (1) कांग्रेस, (2) समाजवादी। प्रश्न यह नहीं है कि हमें कांग्रेस में शामिल होना चाहिए या नहीं, प्रश्न यह है कि हमें कांग्रेस में शामिल होना चाहिए या समाजवादी पार्टी में।
‘‘मैंने कहा था कि मेरी सलाह है कि आप एक तीसरी पार्टी बनाएं ताकि अनुसूचित जातियाँ संतुलन कायम रख सकें और इसके द्वारा वे सौदबाजी की शक्ति प्राप्त कर सकें। किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का कोई फायदा नहीं है। किसी राजनीतिक पार्टी में केवल उसके शिविर अनुयायियों के रूप में शामिल होने का कोई फायदा नहीं है। यदि वह कुछ देती है, तो वह केवल पद देती है, वह शक्ति नहीं दे सकती।
‘‘आपके सम्मलेन ने अभी आपको सेवाओं में केवल 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पंत सरकार के खिलाफ एक निन्दा प्रस्ताव पास किया है जबकि विशुद्ध जनसंख्या के आधार पर आप लगभग 22 प्रतिशत आरक्षण के हकदार हैं। श्री पंत ने आपको पूरा आरक्षण कोटा क्यों नहीं दिया? क्योंकि यह संयुक्त प्रांत विधानसभा में उनके बहुमत के लिए है वह आप पर आश्रित नहीं हैं। ऐसा तभी हो सकता है जब आप सौदेबाजी के योग्य एक पृथक संगठन के रूप में एकजुट हो जाएँ। तभी आप 22 प्रतिशत की माँग कर सकते हैं, और उन्हें इतना आरक्षण आपको देना होगा।
‘‘इसके बाद मैं अनुसूचित जातियों और तथाकथित पिछड़ें वर्गों में एकता के सवाल पर बोला था। ऐसा मैंने सम्मलेन में उपस्थित पिछड़ें वर्ग के नेताओं के अनुरोध पर किया था। मैंने कहा था कि यह खेद का विषय है कि ऐसे दो वर्ग, जिनकी जरूरतें एक-सी हैं, परस्पर हाथ नहीं मिलाते हैं। कारण था कि पिछड़े वर्ग अनुसूचित जातियों के साथ अपने आपको जोड़ना नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें भय है कि ऐसे सम्मिलन से वे स्वयं अनुसूचित जातियों के स्तर तक गिर जाएँगे।
‘‘मैंने कहा था मैं अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के बीच परस्पर
खान-पान और अंतर-विवाह स्थापित करने के लिए आतुर नहीं हूँ। वे पूरी तरह पृथक सामाजिक असितत्व बनाए रख सकते हैं। पर कोई कारण नहीं है कि वे अपनी पिछड़ी अवस्था को दूर करने के लिए एक राजनीतिक दल बनाने के लिए हाथ न मिलाएँ। मैंने संकेत दिया था कि अनुसूचित जातियों ने देश की राजनीति में अपनी भूमिका अदा करके अपनी अवस्था मे कहीं बेहतर सुधार किया है और कोई कारण नहीं है कि पिछड़े वर्गों को भी ऐसा नहीं करना चाहिए।
‘‘मैंने कहा था कि अनुसूचित जातियाँ और पिछड़े वर्ग देश की आबादी की बहुसंख्या है। कोई कारण नहीं है कि वे इस देश पर शासन न करें। आवश्यक है