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सभा में देख लेंगे लेकिन, मुझे नहीं। वास्तव में, चूँकि हमारी पार्टी की सदस्य संख्या पर्याप्त नहीं थी इसलिए मुझे संविधान सभा में बंगाल से चुनाव लड़ना पड़ा।’’
‘‘मैंने संविधान सभा में ही प्रवेश नहीं किया था बल्कि बाद में मुझे संविधान के प्रारुपण का अद्वितीय सम्मान भी सौंपा गया था। यह सम्मान मैं अपने लिए उतना नहीं मानता, जितना पार्टी के लिए। हमें अंग्रेजों और मुसलमानों की कठपुतली कहा गया था। लेकिन हमें अंग्रेजां से सौदेबाजी करनी थी, क्योंकि हम स्वतंत्र नहीं थे और अपने हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य थे।’’ ख्1,
उन्होंने आगे कहा कि वह अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से संविधान सभा में गए थे, न कि संविधान का प्रारूपण करने की महत्वाकांक्षा से। बहरलाल, कुछ परिस्थितियों के कारण, संविधान के प्रारूपण का उत्तरदायित्व उनके कंधों पर डाला गया और उन्हें गर्व था कि उनका नाम संविधान निर्माताओं के साथ जोड़ा गया है, क्योंकि किसी को ऐसा अद्वितीय मौका जीवन में एक बार ही मिलता है।’’ ख्2,
इसके बाद ज्यादा वैयक्तिक तौर पर बोलते हुए डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की, कुछ लोग सोचते है। कि चूँकि मैं राजधानी में हूँ, मेरा फेडरेशन के साथ संपर्क नहीं रहा है और मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है। लेकिन आज की जनसभा से स्पष्ट है कि मैं पहले की अपेक्षा ज्यादा मजबूत जमीन पर हूँ।
कानून मंत्री ने पूरे प्रभावकारी समारोह के दौरान अपनी गंभीर मुद्रा बनाए रखी। उन्होंने अपने और कांग्रेस के बीच कटु अतीत को याद किया, किंतु दलितों से यह जोरदार अपील की कि वे दूसरे राजनीतिक समूहों से अपने आपको अलग न रखें, बल्कि समाज की भलाई के लिए उनका सहयोग माँगे।
उन्होंने घोषणा की, ‘फिलहाल राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं है और यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि हम किसी पार्टी के साथ गठजोड़ करेंगे।’ स्वाधीनता पूर्व उनके उद्गारां की तुलना में, तनाव के साथ बोलना अजीब लगता था। डॉ. अम्बेडकर ने अपने समाज को झकझोरा और कहा कि वे केवल अपने लिए न सोचें बल्कि संपूर्ण देश के लिए भी सोचें। आगे उन्होंने कहा, ‘‘भारत को मुस्लिमों और अंग्रेजों द्वारा गुलाम बनाया गया, किंतु आज हम स्वतंत्र हैं और हम यह सुनिश्चित करने का प्रयत्न करें कि इतिहास अपने आपको न दोहराये।
12 स्रोत सामग्री, खंड 1 पृष्ठ 358-360. कीर, पृष्ठ 418