378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘हालांकि हमारी कांग्रेस के साथ लंबे अर्से तक अनबन रही फिर भी वर्तमान सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए कुछ किया है। लोकतंत्र में कोई भी अल्पसंख्यक अपने आप अधिक प्राप्त नहीं कर सकता। हम अल्पसंख्यक हैं, और अल्पसंख्यक रहेंगे इसलिए कुछ पार्टियों का सहयोग मांगना आवश्यक है।’’
इसके बाद डॉ. अम्बेडकर चुनाव के विषय पर बोले ‘हम एक गरीब समाज के लोग और हमारे पास चुनाव में खर्च करने के लिए भारी रकम नहीं है इसलिए मेरा सुझाव है कि चुनाव कोष में वृद्धि करने प्रत्येक प्रौढ़ व्यक्ति चार आने प्रति माह की दर से पार्टी के चुनाव कोष में अंशदान करे। हमें यह काम तुरंत शुरू कर देना चाहिए ताकि हम चुनाव से पहले काफी धनराशि जुटा सकें।
एन.पी. सभा समाप्त होने के बाद चार घंटे तक मध्य और उत्तरी बंबई में दलितों ने अपने-अपने घर लौटते हुए शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों को जीवंत बना दिया, और उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के पक्ष में खूब नारे लगाए।’ ख्1,
बहरहाल डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के भाषण में उस विषय पर कुछ अतिरिक्त पहलू सुनाई दिए, जो बंबई क्रानिकल में छापे गए थे। वे पहलू इस प्रकार थे :-
कानून मंत्री ने कहा कि संविधन प्रारूपण समिति के अध्यक्ष के रूप में उनका चुनाव स्वयं उनके लिए ही अद्वितीय सम्मान नहीं है, बल्कि फेडरेशन को एक राजनीतिक शक्ति के रुप में भी माना गया है।
अतीत में उन्हें विषम बाधाओं से जूझना पड़ा है और बहुत सी बाधाएँ तो ऐसी थीं, जिन्होंने उन्हें अंग्रेजों और मुस्लिम लीग की कठपुतली बना दिया था। पिछले 20 वर्षों से कांग्रेस की फेडरेशन से अनवन रही है और वे इस बात के लिए पक्का इरादा रखते हैं कि फेडरेशन का कोई भी प्रतिनिधि संविधान सभा में स्थान प्राप्त न करे।
उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें देश का संविधान बनाने का उत्तरदायित्व सौंपा जाएगा। अब विपक्षी लोगों ने भी यह मान लिया है कि फेडरेशन एक राजनीतिक शक्ति है जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता या जिसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।
एन.पी. डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि अब तक फेडरेशन ने संकीर्ण मार्ग अपनाया है अर्थात् अपने हितों को देश के हितों से ऊपर रखा है, और उन्होंने माना कि इसके
1 स्रोत सामग्री, खंड 1 पृष्ठ 358-360.