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तत्काल डोमिनियन स्थिति :
- इस अधिवेशन को केवल वे विषय, जिनका कार्यकारी दायित्व हस्तान्तरण
प्रशासनिक कुशलता की वजह से तुरन्त नहीं किया जा सकता को छोड़कर
बाकी सभी विषयों के नियंत्रण का अंतरण करने में इस काँग्रेस को तत्काल
डोमिनियन उद्देश्य पूर्ति के लिए कोई आपत्ति नहीं है। शर्त यह है कि
दलित वर्ग की सुरक्षा व संरक्षा के लिए भारतीय संविधान में निम्न प्रावधान
कर दिए जाएंः-
- केन्द्रीय व प्रांतीय स्तर पर पूरे देश से दलित वर्ग के सांसदों व विधायकों
का पर्याप्त संख्या में प्रतिनिधित्व।
देश की लोक सेवाओं में पर्याप्त अनुपात में आरक्षण।
ऐसे प्रकरण जिनमें शिक्षा सम्बन्धी उपेक्षित स्थानीय स्वशासित सरकार व
दलित वर्ग के अधिकार व हितों से टकराव हो, राज्य के सचिव को पुनर्विचार
करने के बारे में अपील का अधिकार। इस व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए
आवश्यक हो कि राज्य सचिव को पुनर्विचार कर बजट में प्रावधान या ऐसी
व्यवस्था जो उसे उचित लगे प्रमाणित करने की क्षमता प्राप्त हो और उनका
दिया प्रमाण पत्र भारतीय राज्यों व केन्द्रीय कार्यपालिका के लिए बाध्य हो।
अमानवीय व्यवहारः
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- क्योंकि रूढि़वादी लोग दलित वर्ग के लोगों के प्रति उनके अमानवीय व्यवहार
को बदलने व दलितों का विष्वास जीतने में असफल रहे हैं और भविष्य
के भारतीय संविधान में दलित वर्ग के बचाव में प्रावधान लाने के लिए
स्वीकृति व रुचि नहीं दिखाई है, अतः दलित वर्ग का यह मानना है कि
कोई भी राजनीतिक भारतीय संविधान देश की सामाजिक दशा को ध्यान
में रखे बगैर तथा बिना आपसी सहमति के आवश्यक लचीलापन लाने में
सफल नहीं हो सकता और नागरिक अवज्ञा आन्दोलन किसी भी प्रकार
की शान्ति वार्ता के वातावरण के प्रतिकूल व शान्ति वार्ता में अवरोधक है।
इसलिए, यह अधिवेशन नागरिक अवज्ञा आन्दोलन के मार्ग को स्वीकृति
प्रदान नहीं कर सकता और दलित वर्ग को इस आन्दोलन में भाग न लेने
का परामर्श देता है।