20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गोलमेज की स्वीकृतिः
- यह अधिवेशन गोलमेज अधिवेशन को वर्तमान संवैधानिक समस्याओं को
सुलझाने का सर्वोत्तम उपाय मानता है तथा दलित वर्ग को इसमें भाग लेने
का परामर्श देता है। यह अधिवेशन इस अवसर का लाभ लेते हुए सरकार
से यह अनुरोध करता है कि सभी दल (जिसमें दलित वर्ग भी आते हैं) से
जनसंख्या अनुपात के आधार पर प्रतिनिधि आमंत्रित कर गोलमेज अधिवेशन
को सफल बनावें।
- यह अधिवेशन मनोनीत सिद्धान्त द्वारा दलित वर्ग प्रतिनिधियों के देश की
विधायिकाओं के लिए चयन का विरोध करता है। हम साइमन आयोग
सिफारिश के इस आशय को कि दलित वर्ग के प्रतिनिधियों का चयन (गैर
दलित) दूसरे समुदायों के लोगों द्वारा मनोनीत व राज्यपाल द्वारा प्रमाणित
किए जाने को सिरे से नकारते हैं और हम यह मांग करते हैं कि दलित
प्रतिनिधित्व हमारे अपने समुदाय के सदस्यों द्वारा चुनाव के माध्यम से
निर्धारित होना चाहिए।
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संयुक्त निर्वाचक मंडल की मांगः
- यूं तो हमारा विश्वास पृथक निर्वाचक मंडल की प्रभाविकता में है फिर भी
यह कांग्रेस संयुक्त निर्वाचक मंडल के सिद्धान्त को मानने को तैयार है।
उसमें दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षित स्थान के साथ वयस्क
मताधिकार प्रणाली का पालन हो।
- यह अधिवेशन खेद व्यक्त करता है कि साइमन कमीशन ने दलित वर्ग की
समस्याओं तथा मांगों को कम आंका है और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों
के प्रति झुकाव दिखाया है जबकि दलित वर्ग द्वारा झेली गई सामाजिक
विषमतायें कहीं ज्यादा़ हैं और अल्पसख्यकों को कोई सामाजिक विषमता नहीं
झेलनी पड़ती। यह अधिवेशन सब अल्पसंख्यकों के हित के लिए सामाजिक
समानता के सिद्धान्त का आवाहन करते हुए दलित वर्ग के लिए जनसंख्या
के अनुपात के साथ-साथ सामाजिक विषमताओं को ध्यान में रखते हुए
उचित संख्या व मात्रा में प्रतिनिधत्व दिये जाने की मांग करता है। अप्रत्यक्ष प्रतिनिधित्वः
- यह अधिवेशन विधायिकाओं व राज्य परिषद में दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व के
लिए अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को स्वीकार करता है। परन्तु यह मांग करता