118. 2.5.1950 धर्म को हर व्यक्ति, विरासत से नहीं, बल्कि तार्किक ढंग से जांचे-परखे। - Page 403

382 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संप्रतीक भी प्रदान किया और जिस समय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति शपथ ले रहे थे उस ऐतिहासिक अवसर पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई थी, न कि असंख्य हिंदू देवी-देवताओं में से किसी की।

उन्होंने कहा कि न राम, न कृष्ण न ही कोई भी देवता, वास्तव में भगवान बुद्ध के समतुल्य है। डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की कि उनसे बड़ा कोई भी संत और नायक पैदा नहीं होगा।

डॉ. अम्बेडकर ने रामायण और महाभारत में से अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए और रामचंद्र तथा भगवान कृष्ण की महानता पर सवाल खड़े किए, जिनके व्यवहार के बारे में लिखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सत्य और मानव के प्रेम को धर्मान्धता के तौर पर प्रतिपादित करता है, जिसके अनुसार कोई किसी बात पर विवाद नहीं कर सकता और अपने अनुयायियों की बहुलता को यथावत कायम रखना चाहता है।

उन्होंने यह कहकर ब्राह्मणों की आलोचना की कि सम्राट के अधिकार के सिवाय सभी अधिकार उन्होंने दृढ़ता से अपने पास रखे, क्योंकि हिंदू शास्त्र के अनुसार, उन अधिकारों के धारक अर्थात् सम्राट को नरक में जाना पड़ जाता है। उन्होंने पूछा कि जिस धर्म का निरंतर तिरस्कार किया जा रहा है, उसमें करोड़ों लोग कैसे आस्था रख सकते हैं?

उन्होंने घोषणा की कि समय आ गया है जब धर्म, वस्तुओं और पशुओं की भाँति पुत्र को पिता से विरासत में न मिले, बल्कि निजी तौर पर स्वीकार करने से पहले हर व्यक्ति उसकी तार्किक ढंग से जाँच-परख करे।

डॉ. अम्बेडकर ने यह स्पष्ट किया कि समाजवादियों और साम्यवादियों की भाँति वह इस बात में विश्वास नहीं रखते कि धर्म व्यर्थ है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, ‘मैं मानता हूँ मनुष्य के लिए धर्म आवश्यक है। जब धर्म समाप्त हो जाएगा, तो समाज का भी अंत हो जाएगा।’ डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा, ‘आखिरकार कोई भी सरकार, मानव जाति की रक्षा और उन्हें अनुशासित नहीं कर सकती है जैसा कि धर्म एवं नीति करने में समर्थ हैं।’

बर्मा के राजदूत सर मौंग गाई ने उस सभा की अध्यक्षता की और कहा था कि आज विश्व दुखी और परेशान है, बौद्ध धर्म से उसे शांति और सांत्वना मिलेगी। महाबोधि सोसाइटी के एक पदाधिकारी ने घोषणा की कि सोसाईटी इस बात से बहुत खुश है कि डॉ. अम्बेडकर हमारे साथ शामिल हो गए हैं।

डॉ. अम्बेडकर अगले दिन बंबई जाने वाले थे। ख्1,

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1 द भारत, 3 मई, 1950